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पीएमओ और रेल मंत्रालय की शरण में गए चीनी कंपनी के साथ काम करने वाले ठेकेदार 

Fri, 17 Jul 2020 10:00 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 Jul 2020 10:00 PM IST
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Contractors working with Chinese company visited the PMO and Ministry of Railways
prayagraj news - फोटो : prayagraj
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ईडीएफसी ) में सिग्नलिंग का काम रही एक चाइनीज कंपनी द्वारा उसके ठेकेदारों को कार्य का भुगतान न दिए जाने का मामला पीएमओ और रेल मंत्रालय तक पहुंच गया है। करोड़ों रुपये के इस भुगतान के मामले में संबंधित चाइनीज कंपनी के साथ काम कर रहे स्थानीय ठेकेदारों ने शुक्रवार को ट्वीट करके इस मामले में पीएमओ से मदद मांगी है। ठेकेदारों ने रेल मंत्री, सीआरबी, मेंबर इंजीनियरिंग, मेंबर ट्रैफिक, डीएफसीसीआईएल के एमडी आदि को भी ई मेल भेजकर बकाया भुगतान की मांग की है।
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दरअसल डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ( डीएफसीसीआईएल ) ने कानपुर से लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन तक 417 किलोमीटर रूट की सिग्नलिंग के लिए 471 करोड़ रुपये का टेंडर चीन की बीजिंग रेलवे रिसर्च एंड सिग्नल कम्युनिकेशन कंपनी को दिया था। संबंधित कंपनी द्वारा धीमी गति से काम करने एवं भारत-चीन सीमा विवाद की वजह से रेल मंत्रालय ने यह टेंडर निरस्त कर दिया।  
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चीन की इस कंपनी द्वारा यहां तमाम कार्य स्थानीय ठेकेदारों से करवाए जा रहे थे। टेंडर निरस्त हो जाने के बाद स्थानीय ठेकेदारों का तकरीबन 25 करोड़ रुपये चीनी कंपनी पर बकाया हो गया। बकाया भुगतान को लेकर बुधवार को मेयोहाल चौराहे के पास  चीनी कंपनी के दफ्तर पर प्रदर्शन तो वहीं बृहस्पतिवार को सूबेदारगंज स्थित ईडीएफसीसी के सीपीएम ईस्ट से मिलने का प्रयास किया गया। लेकिन वहां मुलाकात न होने से हताश ठेकेदारों ने शुक्रवार को जहां पीएमओ को इस मामले में ट्वीट किया तो वहीं रेल मंत्रालय को ई मेल कर इस पूरे वाकये के बारे में बताया गया।
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ठेकेदार आरके मिश्र ने बताया कि चीनी कंपनी के अफसर प्रयागराज से बिना किसी को कुछ बताए गायब हो गए हैं। ईडीएफसीसी के अफसर भी इस बारे  में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताय कि हर्ष मिश्र, बब्बू तिवारी, रामलखन तिवारी आदि ठेकेदारों ने भी रेल मंत्रालय को ई मेल भेजकर मांग की है कि उनका बकाया भुगतान किया जाए।


कहा कि हम सभी ठेकेदारों पर सैकड़ों की संख्या में मजदूर आश्रित है। अगर भुगतान न हुआ तो मजदूरों के सामने भी जीवकोपार्जन का संकट आ जाएगा। वहीं दूसरी ओर डीएफसीसीआईएल के सीपीआरओ वेद प्रकाश पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि चीनी कंपनी को 19 करोड़ का पेमेंट पूर्व में किया जा चुका है।
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