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हज यात्रा के लगातार बढ़ रहे खर्चों से घट रहे यात्री
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बीते वर्ष निर्धारित कोटे से भी कम भरे गए थे फार्म सो नहीं हुआ कुर्रा (लॉटरी)
अबकी भी पहले चरण में सिर्फ 480 फार्म ही भरे गए, पिछली बार कोटा 865
प्रयागराज। जिंदगी में कम से कम एक बार मक्का में काबा शरीफ का तवाफ (चक्कर) लगाने की ख्वाहिश हर किसी अकीदतमंद की होती है और ऐसी ख्वाहिश रखने वालों की तादात भी कम नहीं है। लेकिन, हज यात्रा पर जाने वालों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। बीते वर्ष प्रयागराज से 865 यात्रियों का कोटा था लेकिन सिर्फ 710 यात्री ही हज पर गए।
इस वर्ष भी दस अक्तूबर से दस नवंबर तक के बीच ऑन लाइन फॉर्म भरा जाना था। मुंबई हज कमेटी से मिली रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में सिर्फ 480 यात्रियों ने ही फार्म भरा था। हालांकि फार्म भरने की तारीख पांच दिसंबर तक बढ़ा दी गई है लेकिन मुमकिन है कि इस बार भी यह संख्या निर्धारित कोटे से कम ही रहे। तीन-चार बरस पहले जहां हज पर जाने वालों की किस्मत का फैसला कुर्रा (लॉटरी) के माध्यम से होता था, वहीं बीते वर्ष कोटे से कम संख्या होने के कारण कुर्रा ही नहीं हुआ। फिलहाल इस बार भी ऐसे ही संकेत दिख रहे हैं।
हज यात्रा पर जाने वालों की संख्या में कमी की खास वजह इससे जुड़े खर्चों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। आंकड़ें गवाह हैं कि जुलाई 2018 में हज यात्रियों को अजीजिया कैटेगरी के लिए 7150 रुपये और ग्रीन कैटेगरी के लिए 7750 रुपये और जमा करने पड़े जो बीते वर्ष की अपेक्षा तकरीबन 31-32 हजार रुपये ज्यादा थे। इसी तरह पिछले वर्ष अजीजिया में 2.60 लाख रुपये और ग्रीन (एनसीटीजेड-नो कुकिंग ट्रांसपोर्ट जोन) में खर्च 2.98 लाख रुपये था जो बीते वर्ष की अपेक्षा क्रमश: 22 से 27 हजार रुपये तक ज्यादा था। इस बार भी मामूली ही सही लेकिन बढ़ोतरी तो मुमकिन है।
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मेट्रो, ट्रांसपोर्ट सहित मक्का और मदीना में होटलों के खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। वैसे भी सऊदी अरब में जब रियाल में कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर भारत में रुपयों पर पड़ता है। हाजी मोईन अहमद खां, सचिव, खुद्दामाने हज कमेटी
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अबकी भी पहले चरण में सिर्फ 480 फार्म ही भरे गए, पिछली बार कोटा 865
प्रयागराज। जिंदगी में कम से कम एक बार मक्का में काबा शरीफ का तवाफ (चक्कर) लगाने की ख्वाहिश हर किसी अकीदतमंद की होती है और ऐसी ख्वाहिश रखने वालों की तादात भी कम नहीं है। लेकिन, हज यात्रा पर जाने वालों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। बीते वर्ष प्रयागराज से 865 यात्रियों का कोटा था लेकिन सिर्फ 710 यात्री ही हज पर गए।
इस वर्ष भी दस अक्तूबर से दस नवंबर तक के बीच ऑन लाइन फॉर्म भरा जाना था। मुंबई हज कमेटी से मिली रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में सिर्फ 480 यात्रियों ने ही फार्म भरा था। हालांकि फार्म भरने की तारीख पांच दिसंबर तक बढ़ा दी गई है लेकिन मुमकिन है कि इस बार भी यह संख्या निर्धारित कोटे से कम ही रहे। तीन-चार बरस पहले जहां हज पर जाने वालों की किस्मत का फैसला कुर्रा (लॉटरी) के माध्यम से होता था, वहीं बीते वर्ष कोटे से कम संख्या होने के कारण कुर्रा ही नहीं हुआ। फिलहाल इस बार भी ऐसे ही संकेत दिख रहे हैं।
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हज यात्रा पर जाने वालों की संख्या में कमी की खास वजह इससे जुड़े खर्चों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है। आंकड़ें गवाह हैं कि जुलाई 2018 में हज यात्रियों को अजीजिया कैटेगरी के लिए 7150 रुपये और ग्रीन कैटेगरी के लिए 7750 रुपये और जमा करने पड़े जो बीते वर्ष की अपेक्षा तकरीबन 31-32 हजार रुपये ज्यादा थे। इसी तरह पिछले वर्ष अजीजिया में 2.60 लाख रुपये और ग्रीन (एनसीटीजेड-नो कुकिंग ट्रांसपोर्ट जोन) में खर्च 2.98 लाख रुपये था जो बीते वर्ष की अपेक्षा क्रमश: 22 से 27 हजार रुपये तक ज्यादा था। इस बार भी मामूली ही सही लेकिन बढ़ोतरी तो मुमकिन है।
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मेट्रो, ट्रांसपोर्ट सहित मक्का और मदीना में होटलों के खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। वैसे भी सऊदी अरब में जब रियाल में कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर भारत में रुपयों पर पड़ता है। हाजी मोईन अहमद खां, सचिव, खुद्दामाने हज कमेटी