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जमीनी नेतओं को संगठन में जगह मिले तो बने बात
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Congress Party
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कांग्रेस की कार्यकर्ता संवाद संगोष्ठी‘अभिव्यक्ति: दशा और दिशा’ में संगठनात्मक हितों पर चर्चा
प्रयागराज। रिफॉर्म यूपी कांग्रेस मुहिम के तहत रविवार को कांग्रेस की ओर से जमीनी कार्यकर्ता संवाद संगोष्ठी‘अभिव्यक्ति: दशा और दिशा’ में संगठनात्मक ढांचे में सुधार के पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया गया। राजर्षि मंडपम सभागार में पार्टी हितों को नुकसान पहुंचाने वाली बयानबाजी पर अंकुश लगाने,राष्ट्रीय मुद्दों पर जन भावना के विपरीत टिप्पणी न देने व समर्पित कार्यकर्ताओं को संगठन में तरजीह देने का सुझाव दिया गया।
इस मुहिम के प्रदेश कोऑर्डिनेटर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रवक्ता कमलाकर त्रिपाठी ने संगोष्ठी में संगठनात्मक सुधार के पहलुओं पर विस्तार से रोशनी डाली। कहा गया कि पिछले तीन दशक में यूपी में कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा तेजी से कमजोर हुआ है। अब इसके पुनरुत्थान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। इस संबंध में प्रयागराज एवं आसपास के जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों की राय भी ली गई। सकारात्मक परिवर्तन को लेकर जिन तीन बिंदुओं पर मंथन किया गया, उनमें शीर्ष नेतृत्व को संगठनात्मक सुधार की प्रक्रिया अपनाने, सत्तारूढ़ दल एवं अन्य विपक्षी दलों की रणनीति को देखते हुए ब्लाक एवं बूथ के स्तर तक संगठन को पहुंचाने, कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं से संवाद जोड़ने में हो रही कमियों को दूर करने का मुद्दा प्रमुखता से शामिल था। संगोष्ठी में वक्ताओं का कहना था कि राष्ट्रीय नेतृत्व का कोई भी बयान या एक्शन आमजन भावना के विपरीत नहीं होना चाहिए, जैसा कि जम्मू -कश्मीर के मुद्दे पर हुआ। प्रदेश की कमान उन लोगों को सौंपी जानी चाहिए, जिनका एक लंबा समय कांग्रेस के जरिए जन सेवा में गुजरा हो। मणिशंकर अय्यर, सैम पित्रोदा, दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं की अनर्गल बयानबाजी पर अंकुश लगना चाहिए। इस मौके पर श्याम कृष्ण पांडेय, शैलेंद्र, अभय अवस्थी, सुरेश यादव, जागृति सिंह, अनूप सिंह, पूनम सिंह, अशफाक, पवन पांडेय,रेखा सिंह, जेपी तिवारी, विकास, चमन रावत, अनिल कुशवाहा, इरफान उल हक, अनिल, राजेंद्र पांडेय,अंशुमान पटेल, महेश सिंह, नफीस अनवर, अविनाश तबस्सुम समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
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प्रयागराज। रिफॉर्म यूपी कांग्रेस मुहिम के तहत रविवार को कांग्रेस की ओर से जमीनी कार्यकर्ता संवाद संगोष्ठी‘अभिव्यक्ति: दशा और दिशा’ में संगठनात्मक ढांचे में सुधार के पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया गया। राजर्षि मंडपम सभागार में पार्टी हितों को नुकसान पहुंचाने वाली बयानबाजी पर अंकुश लगाने,राष्ट्रीय मुद्दों पर जन भावना के विपरीत टिप्पणी न देने व समर्पित कार्यकर्ताओं को संगठन में तरजीह देने का सुझाव दिया गया।
इस मुहिम के प्रदेश कोऑर्डिनेटर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रवक्ता कमलाकर त्रिपाठी ने संगोष्ठी में संगठनात्मक सुधार के पहलुओं पर विस्तार से रोशनी डाली। कहा गया कि पिछले तीन दशक में यूपी में कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा तेजी से कमजोर हुआ है। अब इसके पुनरुत्थान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। इस संबंध में प्रयागराज एवं आसपास के जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों की राय भी ली गई। सकारात्मक परिवर्तन को लेकर जिन तीन बिंदुओं पर मंथन किया गया, उनमें शीर्ष नेतृत्व को संगठनात्मक सुधार की प्रक्रिया अपनाने, सत्तारूढ़ दल एवं अन्य विपक्षी दलों की रणनीति को देखते हुए ब्लाक एवं बूथ के स्तर तक संगठन को पहुंचाने, कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं से संवाद जोड़ने में हो रही कमियों को दूर करने का मुद्दा प्रमुखता से शामिल था। संगोष्ठी में वक्ताओं का कहना था कि राष्ट्रीय नेतृत्व का कोई भी बयान या एक्शन आमजन भावना के विपरीत नहीं होना चाहिए, जैसा कि जम्मू -कश्मीर के मुद्दे पर हुआ। प्रदेश की कमान उन लोगों को सौंपी जानी चाहिए, जिनका एक लंबा समय कांग्रेस के जरिए जन सेवा में गुजरा हो। मणिशंकर अय्यर, सैम पित्रोदा, दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं की अनर्गल बयानबाजी पर अंकुश लगना चाहिए। इस मौके पर श्याम कृष्ण पांडेय, शैलेंद्र, अभय अवस्थी, सुरेश यादव, जागृति सिंह, अनूप सिंह, पूनम सिंह, अशफाक, पवन पांडेय,रेखा सिंह, जेपी तिवारी, विकास, चमन रावत, अनिल कुशवाहा, इरफान उल हक, अनिल, राजेंद्र पांडेय,अंशुमान पटेल, महेश सिंह, नफीस अनवर, अविनाश तबस्सुम समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
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