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आओ करें रक्तदान, बचाएं मरीजों की जान
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 01 Oct 2015 02:20 AM IST
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इलाहाबाद । आखिरकार महादान करने का वक्त आ ही गया। आओ हम सब मिलकर रक्तदान करें और मरीजों की जिंदगी बचाने में अपना पुनीत योगदान दें। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ की ओर से आज बृहस्पतिवार को सुबह नौ बजे से बेली अस्पताल के ब्लड बैंक में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर में पहुंचकर रक्तदान कर थैलीसीमिया, एप्लास्टीसीमिया, डेंगू, समेत कई गंभीर रोगों से पीड़ित बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जिंदगी को नई रोशनी देें। अमर उलाला फाउंडेशन अपने समाचार पत्र के माध्यम से आप लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर लगातार प्रेरित कर रहा है। अब बारी आपकी है कि आप अमर उजाला फाउंडेशन के इन प्रयासोें को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं के ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन की जांच के साथ ही चिकित्सकों द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। जिसमें उनका रक्तचाप परीक्षण भी शामिल हैं। इतना ही नहीं शिविर के दौरान विशेषज्ञों द्वारा इस बात की भी जानकारी दी जाएगी कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या क्या कदम उठाए जाएं। साथ ही रक्तदान से जुड़ी तमाम भ्रांतियाें का भी निराकरण किया जाएगा।
डॉ. सुजीत सिंह, डॉ. आशा सिंह, डॉ. अशोक द्विवेदी, डॉ. एसडी वर्मा, डॉ. नीता वर्मा, सीनियर गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. आलोक मिश्रा, आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एपी सिंह, डॉ. बीबी अग्रवाल, डॉ. सबिता अग्रवाल, डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. कीर्तिका अग्रवाल, डॉ. एसके राय, डॉ. राकेश चंद्रा, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश खेतान, डॉ. सुषमा खेतान, डॉ. प्रशांत पटेल, डॉ. नीरज, डॉ. आरएस ठाकुर, आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एके वर्मा, डेंटल सर्जन डॉ. वैभव शुक्ला, समेत तमाम जागरूक शहरियों ने अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए रक्तदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।
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प्रकृति ने रक्त का कोई विकल्प नहीं दिया है। ऐसे में रक्तदान से खून की पूर्ति की जा सकती है। रक्तदान करके आप गंभीर रोगियों की जान बचा सकते हैं। अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। इससे अन्य सामाजिक संगठनों को सीख लेनी चाहिए। स्वैच्छिक रक्तदाताओं से अपील है कि वे रक्तदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें।
00 डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कालेज
आपके रक्त के एक एक बूंद किसी बच्चे, महिला, बुजुर्ग की जान बचा सकती है। रक्तदान से शरीर में खून की कमी हो जाती है सिर्फ भ्रांति है। रक्तदान से शरीर में बोनमैरो की मदद से नए रक्त का संचार होता है जो नई आरबीसी के साथ आक्सीजन को और अधिक प्रभावी ढंग से कोशिकाओं को पहुंचाता हैं जिससे शारीरिक क्षमता बढ़ती है।
डॉ. वीके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बेली अस्पताल
रक्तदान महादान है। एक रक्तदान से चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। रक्तदान से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। ऐसे में हृदयरोगों की संभावना बेहद कम हो जाती है। रक्तदान के ठीक 24 घंटे के भीतर उसकी पूर्ति हो जाती है। रक्तदान से डरें नहीं, बेहिचक रक्तदान करें।
00 डॉ. ओपी त्रिपाठी, वरिष्ठ फिजीशियन बेली अस्पताल
इन तथ्यों पर भी गौर फरमाएं
0 18 से लेकर 60 तक का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।
0 एक यूनिट में 350 मिलीग्राम रक्त होता है।
0 रक्तदान के तीन माह दोबारा रक्तदान किया जा सकता है।
0 एक यूनिट रक्त से एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायोप्रेसीटेट निकाली जा सकती है।
0 स्वस्थ व्यक्ति को साल में एक बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है।
0 जो व्यक्ति हर साल रक्तदान नहीं करते, उनके रक्त का वह अंश जो रक्तदान किया जा सकता था स्वत: ही नष्ट हो जाता है।
रक्तदान के बाद क्या करें
0 रक्तदान बाद धूम्रपान से परहेज करें।
0 रक्तदान बाद कुछ समय तक सुस्ता लें।
0 अगले 10-12 घंटोें तक पर्याप्त मात्रा में पानी या कोई पेय पदार्थ लें।
0 रक्तदान बाद कमजोरी को लेकर कोई भ्रांति न पालें। दैनिक कार्यों को जारी रखें।
रक्तदान शिविर की शुरुआत सुबह नौ बजे तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली हास्पिटल) के ब्लड बैंक में होगी। रक्तदान शिविर को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन एवं ब्लड बैंक प्रबंधन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं के ब्लड ग्रुप और हीमोग्लोबिन की जांच के साथ ही चिकित्सकों द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। जिसमें उनका रक्तचाप परीक्षण भी शामिल हैं। इतना ही नहीं शिविर के दौरान विशेषज्ञों द्वारा इस बात की भी जानकारी दी जाएगी कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या क्या कदम उठाए जाएं। साथ ही रक्तदान से जुड़ी तमाम भ्रांतियाें का भी निराकरण किया जाएगा।
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डॉ. सुजीत सिंह, डॉ. आशा सिंह, डॉ. अशोक द्विवेदी, डॉ. एसडी वर्मा, डॉ. नीता वर्मा, सीनियर गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. आलोक मिश्रा, आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एपी सिंह, डॉ. बीबी अग्रवाल, डॉ. सबिता अग्रवाल, डॉ. नीरज अग्रवाल, डॉ. कीर्तिका अग्रवाल, डॉ. एसके राय, डॉ. राकेश चंद्रा, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश खेतान, डॉ. सुषमा खेतान, डॉ. प्रशांत पटेल, डॉ. नीरज, डॉ. आरएस ठाकुर, आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एके वर्मा, डेंटल सर्जन डॉ. वैभव शुक्ला, समेत तमाम जागरूक शहरियों ने अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए रक्तदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।
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प्रकृति ने रक्त का कोई विकल्प नहीं दिया है। ऐसे में रक्तदान से खून की पूर्ति की जा सकती है। रक्तदान करके आप गंभीर रोगियों की जान बचा सकते हैं। अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। इससे अन्य सामाजिक संगठनों को सीख लेनी चाहिए। स्वैच्छिक रक्तदाताओं से अपील है कि वे रक्तदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें।
00 डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कालेज
आपके रक्त के एक एक बूंद किसी बच्चे, महिला, बुजुर्ग की जान बचा सकती है। रक्तदान से शरीर में खून की कमी हो जाती है सिर्फ भ्रांति है। रक्तदान से शरीर में बोनमैरो की मदद से नए रक्त का संचार होता है जो नई आरबीसी के साथ आक्सीजन को और अधिक प्रभावी ढंग से कोशिकाओं को पहुंचाता हैं जिससे शारीरिक क्षमता बढ़ती है।
डॉ. वीके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बेली अस्पताल
रक्तदान महादान है। एक रक्तदान से चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। रक्तदान से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। ऐसे में हृदयरोगों की संभावना बेहद कम हो जाती है। रक्तदान के ठीक 24 घंटे के भीतर उसकी पूर्ति हो जाती है। रक्तदान से डरें नहीं, बेहिचक रक्तदान करें।
00 डॉ. ओपी त्रिपाठी, वरिष्ठ फिजीशियन बेली अस्पताल
इन तथ्यों पर भी गौर फरमाएं
0 18 से लेकर 60 तक का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।
0 एक यूनिट में 350 मिलीग्राम रक्त होता है।
0 रक्तदान के तीन माह दोबारा रक्तदान किया जा सकता है।
0 एक यूनिट रक्त से एक यूनिट प्लाज्मा, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट आरबीसी और एक यूनिट क्रायोप्रेसीटेट निकाली जा सकती है।
0 स्वस्थ व्यक्ति को साल में एक बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है।
0 जो व्यक्ति हर साल रक्तदान नहीं करते, उनके रक्त का वह अंश जो रक्तदान किया जा सकता था स्वत: ही नष्ट हो जाता है।
रक्तदान के बाद क्या करें
0 रक्तदान बाद धूम्रपान से परहेज करें।
0 रक्तदान बाद कुछ समय तक सुस्ता लें।
0 अगले 10-12 घंटोें तक पर्याप्त मात्रा में पानी या कोई पेय पदार्थ लें।
0 रक्तदान बाद कमजोरी को लेकर कोई भ्रांति न पालें। दैनिक कार्यों को जारी रखें।
रक्तदान शिविर की शुरुआत सुबह नौ बजे तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली हास्पिटल) के ब्लड बैंक में होगी। रक्तदान शिविर को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन एवं ब्लड बैंक प्रबंधन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।