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बेहद मिलानसार थे सीओ देवेंद्र, जीआरपी इंस्पेक्टर के रूप में लंबे समय तक तैनात रहे प्रयागराज में
Sat, 04 Jul 2020 12:16 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:16 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
कानपुर देहात में मुठभेड़ के दौरान जिन पुलिसकर्मियों ने शहादत दी, उनमें सीओ देवेंद्र मिश्र भी शामिल हैं। वैसे उनकी बहादुरी व मिलनसार स्वभाव का कायल संगमनगरी भी रही। वह लंबे समय तक यहां जीआरपी इंस्पेक्टर के रूप में तैनात रहे और अपनी कार्यशैली से बेहद लोकप्रिय भी रहे।
मौजूदा वक्त में बांदा जिले में तैनात इंस्पेक्टर बृजेश यादव 2010 से 2011 तक शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र के अंडर में बतौर एसआई जीआरपी में तैनात रहे। वह बताते हैं, जीआरपी में इंस्पेक्टर रहने के दौरान शहीद सीओ ने अपनी कार्यशैली से सभी का दिल जीता। वह बेहद मिलनसार स्वभाव के थे और उनसे एक बार मिलने के बाद ही व्यक्ति उनका कायल हो जाता था।
यही वजह थी कि उनके न सिर्फ विभाग बल्कि बाहर के बहुत से लोग भी बेहद सम्मान करते थे। जीआरपी इंस्पेक्टर के रूप में उन्होंने जहरखुरानी व ट्रेनों में लूटपाट करने वाले कई गिरोहों का भी भंडाफोड़ किया। बृजेश कहते हैं कि उनकी शहादत हमेशा याद रहेगी। इसी तरह इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव भी शहीद सीओ के साथ तैनाती के दिनों को भी याद कर बेहद भावुक हो गए।
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उन्होंने बताया कि शहीद सीओ ने सीनियर होने के नाते आगे बढ़ने में मदद की, तो सच्चे दोस्त की तरह कभी किसी चीज की कमी भी महसूस नहीं होने दी। उनकी शहादत विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है।
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मौजूदा वक्त में बांदा जिले में तैनात इंस्पेक्टर बृजेश यादव 2010 से 2011 तक शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र के अंडर में बतौर एसआई जीआरपी में तैनात रहे। वह बताते हैं, जीआरपी में इंस्पेक्टर रहने के दौरान शहीद सीओ ने अपनी कार्यशैली से सभी का दिल जीता। वह बेहद मिलनसार स्वभाव के थे और उनसे एक बार मिलने के बाद ही व्यक्ति उनका कायल हो जाता था।
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यही वजह थी कि उनके न सिर्फ विभाग बल्कि बाहर के बहुत से लोग भी बेहद सम्मान करते थे। जीआरपी इंस्पेक्टर के रूप में उन्होंने जहरखुरानी व ट्रेनों में लूटपाट करने वाले कई गिरोहों का भी भंडाफोड़ किया। बृजेश कहते हैं कि उनकी शहादत हमेशा याद रहेगी। इसी तरह इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव भी शहीद सीओ के साथ तैनाती के दिनों को भी याद कर बेहद भावुक हो गए।
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उन्होंने बताया कि शहीद सीओ ने सीनियर होने के नाते आगे बढ़ने में मदद की, तो सच्चे दोस्त की तरह कभी किसी चीज की कमी भी महसूस नहीं होने दी। उनकी शहादत विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है।