{"_id":"572120014f1c1b703fa91715","slug":"chief-secretary-alok-ranjan-extension-challenged","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुख्य सचिव आलोक रंजन के सेवा विस्तार को चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुख्य सचिव आलोक रंजन के सेवा विस्तार को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 28 Apr 2016 02:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्य सचिव आलोक रंजन को सेवा विस्तार देने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मांग की गई है कि सेवा विस्तार देने के आदेश को रद किया जाए तथा आलोक रंजन को मुख्य सचिव के पद से हटाया जाए। याचिका पंजाब प्रांत के पूर्व डीजीपी जेएफ रिबेरा और अन्य रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस अधिकारियों की ओर से दाखिल की गई है। इस पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी।
याचिका में कहा गया है कि आलोक रंजन ने प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने 23 मार्च 2016 को सेवा विस्तार दे दिया है, जबकि वह भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई अदालत में चल रहे मुकदमे का सामना कर रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदेश सरकार ने नौ अप्रैल 2015 को जारी स्थानांतरण नीति में कहा है कि संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों की संवेदनशील पदों पर तैनाती न की जाए। आलोक रंजन को मुख्य सचिव के अति संवेदनशील पद पर तैनाती देकर सरकार ने अपनी ही नीति का उल्लंघन किया है।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि आलोक रंजन ने प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने 23 मार्च 2016 को सेवा विस्तार दे दिया है, जबकि वह भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई अदालत में चल रहे मुकदमे का सामना कर रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदेश सरकार ने नौ अप्रैल 2015 को जारी स्थानांतरण नीति में कहा है कि संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कर्मचारियों की संवेदनशील पदों पर तैनाती न की जाए। आलोक रंजन को मुख्य सचिव के अति संवेदनशील पद पर तैनाती देकर सरकार ने अपनी ही नीति का उल्लंघन किया है।
विज्ञापन