चंद्रशेखर आजाद : लखनऊ से इलाहाबाद म्यूजियम को हस्तांतरित किया जाए आजाद का अस्थि कलश
स्वतंत्रता संग्राम की 1857 से लेकर 1947 तक की क्रांति की गौरव गाथाओं को आजाद गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा। 10 करोड़ रुपये की लागत से यह गैलरी बनकर तैयार हो चुकी है।
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इलाहाबाद म्यूजियम में क्रांतिवीरों की याद में बनकर तैयार देश की पहली इंटरेक्टिव आजाद गैलरी को समृद्ध बनाने की पहल शुरू हो गई है। इस गैलरी में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के अस्थि कलश को लखनऊ से प्रयागराज हस्तांतरित कराने की तैयारी है। लखनऊ म्यूजियम में रखे गए आजाद के अस्थि कलश को इलाहाबाद म्यूजियम में लाने के लिए राजभवन में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से भी वार्ता की गई है। साथ ही लखनऊ म्यूजियम के निदेशक एके सिंह को पत्र भेज दिया गया है।
स्वतंत्रता संग्राम की 1857 से लेकर 1947 तक की क्रांति की गौरव गाथाओं को आजाद गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा। 10 करोड़ रुपये की लागत से यह गैलरी बनकर तैयार हो चुकी है। चूंकि आजाद अल्फ्रेड पार्क में ही ब्रिटिश पुलिस से घिरने के बाद खुद की कनपटी पर गोली मारकर शहीद हो गए थे। ऐसे में उनकी शहादत की इस पावन भूमि पर उनके अस्थि कलश को भी लाने की तैयारी की गई है। म्यूजियम में बनी इंटरेक्टिव गैलरी में चूंकि आजाद की कोल्ट पिस्तौल भी है, जिससे उन्होंने अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज अफसरों के दांत खट्टे कर दिए थे। देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए यह कोल्ट आकर्षण का केंद्र रही है।
ऐसे में संग्रहालय प्रशासन उनके अस्थि कलश को भी यहां लाने की कोशिश में जुट गया है। इसके लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से भी संग्रहालय निदेशक अखिलेश कुमार सिंह मुलाकात कर आग्रह कर चुके हैं। साथ ही लखनऊ म्यूजियम के निदेशक एके सिंह से भी उन्होंने वार्ता की है। हाल में ही इसके लिए इलाहाबाद म्यूजियम की ओर से लखनऊ म्यूजियम के निदेशक को पत्र भी भेजा गया है। कोशिश हो रही है कि इस म्यूजियम में अस्थि कलश को भी प्रदर्शित किया जाए, ताकि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की निशानियों का लोग एक ही जगह दर्शन कर सकें।
मैंने इस आशय से पत्र लिखा है कि प्रयागराज में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का शहीद स्थल भी है और उनकी याद में पार्क भी। देश की पहली इंटरेक्टिव आजाद गैलरी भी यहीं बन चुकी है। उनकी पिस्टल यहीं रखी गई है। ऐसे में अगर अस्थि कलश भी आ जाएगा तो ज्यादा अच्छा रहेगा। इसके लिए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से भी आग्रह किया गया है। लखनऊ म्यूजियम के निदेशक से आग्रह करने के साथ ही उनको पत्र भी लिखा है। - अखिलेश कुमार सिंह, निदेशक-इलाहाबाद म्यूजियम।