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सिर्फ यूपी की महिलाओं को आरक्षण देने को चुनौती
allahabad, amar ujala
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:10 AM IST
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कृषि विभाग में अवर अभियंताओं की भर्ती में सिर्फ उत्तर प्रदेश की ही महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भर्ती परीक्षा का चयन परिणाम जारी होने के बाद गैर यूपी की महिला अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
उत्तराखंड और बिहार की वर्षा सैनी तथा अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल की है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया है कि 2007 में प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर निर्णय लिया कि महिलाओं को मिलने वाले 20 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सिर्फ उत्तर प्रदेश की मूल निवासी महिलाओं को ही दिया जाएगा। इसके बाद याचीगण को आरक्षण के लाभ से वंचित कर दिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि ऐसा निर्णय लेने का अधिकार प्रदेश सरकार को नहीं है। अनुच्छेद 16 (3) के तहत निवास के आधार पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। राज्य सरकार निवास के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं कर सकती है।
अधिवक्ता की दलील थी कि देश में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। सुप्रीमकोर्ट ने राजस्थान में 2002 में अध्यापक नियुक्ति में उसी जिले का निवासी होने की शर्त को असंवैधानिक ठहरा दिया था। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता कहना था कि अनुच्छेद 15(3) में प्रदेश सरकार को महिलाओं का आरक्षण तय करने का अधिकार है। याचिका पर अब अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
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उत्तराखंड और बिहार की वर्षा सैनी तथा अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल की है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया है कि 2007 में प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर निर्णय लिया कि महिलाओं को मिलने वाले 20 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सिर्फ उत्तर प्रदेश की मूल निवासी महिलाओं को ही दिया जाएगा। इसके बाद याचीगण को आरक्षण के लाभ से वंचित कर दिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि ऐसा निर्णय लेने का अधिकार प्रदेश सरकार को नहीं है। अनुच्छेद 16 (3) के तहत निवास के आधार पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार को है। राज्य सरकार निवास के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं कर सकती है।
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अधिवक्ता की दलील थी कि देश में एकल नागरिकता की व्यवस्था है। सुप्रीमकोर्ट ने राजस्थान में 2002 में अध्यापक नियुक्ति में उसी जिले का निवासी होने की शर्त को असंवैधानिक ठहरा दिया था। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता कहना था कि अनुच्छेद 15(3) में प्रदेश सरकार को महिलाओं का आरक्षण तय करने का अधिकार है। याचिका पर अब अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
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