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चयन बोर्ड के अध्यक्ष, सदस्यों की नियुक्ति को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 04 Jul 2015 02:03 AM IST
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इलाहाबाद। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में अपात्र लोगों को अध्यक्ष और सदस्य नियुक्ति करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिका में चेयरपर्सन अनीता यादव, सदस्य आशा लता सिंह और ललित कुमार श्रीवास्तव की पात्रता को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि इनकी इतनी योग्यता नहीं है कि यह प्रधानाचार्यों और एलटी ग्रेड अध्यापकों का चयन कर सकें। याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सुनवाई छह जुलाई को होगी। याचिका पर जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस एके मिश्र की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची अभिलाषा मिश्रा का कहना है कि बोर्ड की अध्यक्ष अनीता यादव और दोनों सदस्यों की नियुक्तियों में निर्धारित मानकों की उपेक्षा की गई। यह तीनों ही इस पद पर नियुक्ति की योग्यता नहीं रखते हैं। बोर्ड के अध्यक्ष पद पर कुलपति की योग्यता रखने वाला व्यक्ति, या प्रशासनिक सेवा में सचिव स्तर का अधिकारी अथवा शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति ही बनाया जा सकता है। जबकि अनीता यादव केके इंटर कालेज इटावा में एलटी ग्रेड की अध्यापिका थीं। वह बोर्ड मेें भी सबसे कनिष्ठ सदस्य थीं, इसके बावजूद उनको अध्यक्ष बनाया गया।
इसी प्रकार से आशा लता सिंह 2007 तक विषय विशेषज्ञ के तौर पर तैनात थीं। ललित कुमार श्रीवास्तव जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में क्लर्क थे। बाद में अध्यापक हुए और अब उनको बोर्ड का सदस्य बना दिया गया है। यह लोग कालेजों के प्राचार्यों और प्रवक्ताओं का साक्षात्कार लेंगे जबकि इनकी स्वयं की योग्यता नहीं है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से इस मामले की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
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याची अभिलाषा मिश्रा का कहना है कि बोर्ड की अध्यक्ष अनीता यादव और दोनों सदस्यों की नियुक्तियों में निर्धारित मानकों की उपेक्षा की गई। यह तीनों ही इस पद पर नियुक्ति की योग्यता नहीं रखते हैं। बोर्ड के अध्यक्ष पद पर कुलपति की योग्यता रखने वाला व्यक्ति, या प्रशासनिक सेवा में सचिव स्तर का अधिकारी अथवा शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति ही बनाया जा सकता है। जबकि अनीता यादव केके इंटर कालेज इटावा में एलटी ग्रेड की अध्यापिका थीं। वह बोर्ड मेें भी सबसे कनिष्ठ सदस्य थीं, इसके बावजूद उनको अध्यक्ष बनाया गया।
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इसी प्रकार से आशा लता सिंह 2007 तक विषय विशेषज्ञ के तौर पर तैनात थीं। ललित कुमार श्रीवास्तव जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में क्लर्क थे। बाद में अध्यापक हुए और अब उनको बोर्ड का सदस्य बना दिया गया है। यह लोग कालेजों के प्राचार्यों और प्रवक्ताओं का साक्षात्कार लेंगे जबकि इनकी स्वयं की योग्यता नहीं है। खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से इस मामले की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
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