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केंद्र के राहत पैकेज से एनसीएलटी में घट गए मुकदमे
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कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल इलाहाबाद (एनसीएलटी) की पीठ में दिवालिया कानून के मुकदमों में भारी कमी आई है। वजह केंद्र सरकार द्वारा निजी उद्योगों के लिए घोषित राहत पैकेज है। इसके तहत अब एक करोड़ रुपये से कम की लेनदारी पर अगले एक साल तक दिवालिया कानून के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। इससे उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, जिनकी एक करोड़ से कम की रकम किसी कंपनी के पास बकाया है। अमूमन एनसीएलटी में इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी एक्ट के तहत हर दिन 25-30 या उससे भी ज्यादा मुकदमे दर्ज होते थे।
एनसीएलटी इलाहाबाद के क्षेत्राधिकार में उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड राज्य भी है। यहां कंपनी कानून के अलावा दिवालिया कानून के तहत भी मुकदमों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज में कंपनियों को राहत देते हुए यह घोषणा की गई है कि एक करोड़ रुपये से कम के बकाए के लिए कंपनी पर दिवालिया कानून के तहत अगले एक साल तक मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। याची जिनका किसी कंपनी पर एक लाख रुपये से लेकर 99 लाख रुपये तक बकाया है, वह मुकदमा नहीं कर सकेंगे। जबकि ऐसे मामले बड़ी संख्या में होते थे। ऐसे में यूपी और उत्तराखंड के लिए ऐसे लेनदारों को जिनका एक करोड़ रुपये से कम बकाया है को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो रही सुनवाई
लॉकडाउन के दौरान हाईकोर्ट की ही तरह ही एनसीएलटी में अतिआवश्यक मुकदमों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही की जा रही है। कर एवं वित्त सलाहकार डा. पवन जायसवाल बताते हैं कि लॉकडाउन की वजह से एनसीएलटी का भी सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है, मगर किसी मामले में अर्जेंसी है तो एप्लीकेशन देकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हो सकती है।
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एनसीएलटी इलाहाबाद के क्षेत्राधिकार में उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड राज्य भी है। यहां कंपनी कानून के अलावा दिवालिया कानून के तहत भी मुकदमों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज में कंपनियों को राहत देते हुए यह घोषणा की गई है कि एक करोड़ रुपये से कम के बकाए के लिए कंपनी पर दिवालिया कानून के तहत अगले एक साल तक मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकेगा। याची जिनका किसी कंपनी पर एक लाख रुपये से लेकर 99 लाख रुपये तक बकाया है, वह मुकदमा नहीं कर सकेंगे। जबकि ऐसे मामले बड़ी संख्या में होते थे। ऐसे में यूपी और उत्तराखंड के लिए ऐसे लेनदारों को जिनका एक करोड़ रुपये से कम बकाया है को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो रही सुनवाई
लॉकडाउन के दौरान हाईकोर्ट की ही तरह ही एनसीएलटी में अतिआवश्यक मुकदमों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही की जा रही है। कर एवं वित्त सलाहकार डा. पवन जायसवाल बताते हैं कि लॉकडाउन की वजह से एनसीएलटी का भी सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है, मगर किसी मामले में अर्जेंसी है तो एप्लीकेशन देकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हो सकती है।
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