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प्रदेश में पहली पाली में पकड़े गए 77 नकलची
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Thu, 19 Feb 2015 11:45 PM IST
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बोर्ड परीक्षा एवं अपनी अव्यवस्था को छिपाने के लिए यूपी बोर्ड लाख जतन कर रहा है। बोर्ड के अधिकारी देर शाम तक मात्र पहली पाली के कुछ नकलचियों की संख्या ही बता रहे थे। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पहली पाली में कुल 77 नकलची पकड़े गए। इसमें 40 लड़के एवं 37 लड़कियां शामिल हैं। बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों पर विश्वास करना इसलिए कठिन है कि अकेले इलाहाबाद में ही पहली पाली में 13 नकलची पकड़े गए। इससे साफ है कि बोर्ड की ओर से जानकारी छिपाई जा रही है। दूसरी पाली में इलाहाबाद में 25 नकलची पकड़े गए।
बोर्ड के अधिकारी अपनी खामियां छुपाने के लिए अपने कन्ट्रोल रूम से समाचार माध्यमों को ब्रीफिंग भी नहीं कर रहे हैं। मानकों और नियमों को दरकिनार करते हुए परीक्षा के दो दिन पहले 101 परीक्षा केंद्र बना दिए गए तो अब परीक्षा के पहले ही दिन कंट्रोल रूम बनाने के बाद भी नकलचियों के बारे में कोई जानकारी देने में सहयोग नहीं कर रहा।
भारी अव्यवस्था के बीच शुरू हुई बोर्ड परीक्षा
कक्ष निरीक्षकों की कमी और प्रवेश पत्रों की गड़बड़ी के कारण मची अफरातफरी के बीच यूपी बोर्ड परीक्षाएं बृहस्पतिवार सुबह शुरू हो गईं। पहले दिन सुबह की पाली में हाईस्कूल हिन्दी का पेपर था तो दूसरी पाली में इंटर हिन्दी का पेपर है। हाईस्कूल में हिन्दी काफी अहम है। हिन्दी में फेल छात्रों को अन्य सभी विषयों में पास होने के बाद भी फेल माना जाता है जबकि किसी अन्य एक विषय में फेल होने पर पास होने की सुविधा मिलती है। हिन्दी की इस अनिवार्यता के कारण इस परीक्षा में सख्ती भी काफी दिखी। केन्द्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं के समय से नहीं पहुंचने पर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में अफरातफरी रही। पहली पाली में कापी खत्म हो जाने पर दूसरी पाली में केन्द्र व्यवस्थापकों ने जिला विद्यालय निरीक्षक से कापी भेजने को कहा।
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कोडिंग एवं सीसीटीवी व्यवस्था से हाथ खींचा
0 बोर्ड की ओर से कोडिंग वाली कापियों की व्यवस्था लागू नहीं करने के कारण अबकी बाहर से कापियां लिखने वालों की मनमानी संभव है। वहीं सीसीटीवी नहीं लगाने के बोर्ड के फैसले से नकल रोकना कठिन हो गया। परीक्षा केन्द्रों पर अबकी बार केन्द्र व्यवस्थापकों की ओर से वीडियो रिकार्डिंग भी नहीं करवाई गई। कापियों पर कोडिंग की व्यवस्था नहीं होने से नकल माफिया को बाहर से कापियां लिखवाने में परेशान नहीं होना पड़ेगा।
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन परीक्षार्थियों ने जितने तनाव के साथ क्लास रूम में प्रवेश किया था, परीक्षा देने के बाद वह उतने ही खुश नजर आए। आसान प्रश्न पत्र देकर परीक्षार्थियों ने राहत की सांस ली। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के पहले दिन हिंदी अनिवार्य विषय की परीक्षा थी। एक तो परीक्षा का पहला दिन और ऊपर से हिंदी का विषय। दोनों ही बातों ने परीक्षार्थियों के टेंशन के स्तर को गई गुना बढ़ा दिया था। मगर प्रश्न पत्र देखते ही परीक्षार्थियों के चेहरे खिल उठे। हाईस्कूल में गद्य, पद्य और संस्कृत के पहले ही चैप्टर से व्याख्या पूछी गई। इंटरमीडिएट का प्रश्नपत्र भी आसान रहा।
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बोर्ड के अधिकारी अपनी खामियां छुपाने के लिए अपने कन्ट्रोल रूम से समाचार माध्यमों को ब्रीफिंग भी नहीं कर रहे हैं। मानकों और नियमों को दरकिनार करते हुए परीक्षा के दो दिन पहले 101 परीक्षा केंद्र बना दिए गए तो अब परीक्षा के पहले ही दिन कंट्रोल रूम बनाने के बाद भी नकलचियों के बारे में कोई जानकारी देने में सहयोग नहीं कर रहा।
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भारी अव्यवस्था के बीच शुरू हुई बोर्ड परीक्षा
कक्ष निरीक्षकों की कमी और प्रवेश पत्रों की गड़बड़ी के कारण मची अफरातफरी के बीच यूपी बोर्ड परीक्षाएं बृहस्पतिवार सुबह शुरू हो गईं। पहले दिन सुबह की पाली में हाईस्कूल हिन्दी का पेपर था तो दूसरी पाली में इंटर हिन्दी का पेपर है। हाईस्कूल में हिन्दी काफी अहम है। हिन्दी में फेल छात्रों को अन्य सभी विषयों में पास होने के बाद भी फेल माना जाता है जबकि किसी अन्य एक विषय में फेल होने पर पास होने की सुविधा मिलती है। हिन्दी की इस अनिवार्यता के कारण इस परीक्षा में सख्ती भी काफी दिखी। केन्द्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं के समय से नहीं पहुंचने पर शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में अफरातफरी रही। पहली पाली में कापी खत्म हो जाने पर दूसरी पाली में केन्द्र व्यवस्थापकों ने जिला विद्यालय निरीक्षक से कापी भेजने को कहा।
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कोडिंग एवं सीसीटीवी व्यवस्था से हाथ खींचा
0 बोर्ड की ओर से कोडिंग वाली कापियों की व्यवस्था लागू नहीं करने के कारण अबकी बाहर से कापियां लिखने वालों की मनमानी संभव है। वहीं सीसीटीवी नहीं लगाने के बोर्ड के फैसले से नकल रोकना कठिन हो गया। परीक्षा केन्द्रों पर अबकी बार केन्द्र व्यवस्थापकों की ओर से वीडियो रिकार्डिंग भी नहीं करवाई गई। कापियों पर कोडिंग की व्यवस्था नहीं होने से नकल माफिया को बाहर से कापियां लिखवाने में परेशान नहीं होना पड़ेगा।
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन परीक्षार्थियों ने जितने तनाव के साथ क्लास रूम में प्रवेश किया था, परीक्षा देने के बाद वह उतने ही खुश नजर आए। आसान प्रश्न पत्र देकर परीक्षार्थियों ने राहत की सांस ली। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के पहले दिन हिंदी अनिवार्य विषय की परीक्षा थी। एक तो परीक्षा का पहला दिन और ऊपर से हिंदी का विषय। दोनों ही बातों ने परीक्षार्थियों के टेंशन के स्तर को गई गुना बढ़ा दिया था। मगर प्रश्न पत्र देखते ही परीक्षार्थियों के चेहरे खिल उठे। हाईस्कूल में गद्य, पद्य और संस्कृत के पहले ही चैप्टर से व्याख्या पूछी गई। इंटरमीडिएट का प्रश्नपत्र भी आसान रहा।