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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Case of child death in school: Son had died in school itself, teachers kept pretending

स्कूल में बच्चे की मौत का मामला : स्कूल में ही दम तोड़ चुका था बेटा, नाटक करते रहे शिक्षक

Sat, 17 May 2025 02:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 17 May 2025 02:51 PM IST
सार

मेरा बेटा स्कूल में ही दम तोड़ चुका था। स्कूल वाले उसे जिंदा बताकर नाटक करते रहे। मैं मासूम बेटे को लेकर एक से दूसरे अस्पताल दौड़ता रहा। बाद में पता चला कि उसकी सांसें काफी पहले थम चुकी थीं।

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विस्तार

मेरा बेटा स्कूल में ही दम तोड़ चुका था। स्कूल वाले उसे जिंदा बताकर नाटक करते रहे। मैं मासूम बेटे को लेकर एक से दूसरे अस्पताल दौड़ता रहा। बाद में पता चला कि उसकी सांसें काफी पहले थम चुकी थीं। स्कूल की शिक्षिकाओं ने उसे पीटा और इस कारण से ही उसकी जान गई। निजी अंगों में चोट कैसे आई, पुलिस इसकी भी जांच करे। मेरे मासूम बेटे को इंसाफ मिले।

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नैनी में एक दिन पहले स्कूल में संदिग्ध हाल में जिस बच्चे की मौत हुई, यह उसके पिता के शब्द हैं। शुक्रवार को घटना के 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीतने के बाद भी उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। हाल यह था कि वह ठीक तरह से बोल भी नहीं पा रहे थे और उनकी जुबां लड़खड़ा रही थी।
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कल क्या हुआ, यह सवाल सुनते ही वह बिलखने लगे। बहुत समझाने पर किसी तरह खुद के संभालते हुए बोले, मेरा बेटा एकदम स्वस्थ था। सुबह 7:30 बजे का स्कूल था और मैं पत्नी के साथ उसे व बेटी को स्कूटी से स्कूल पहुंचाने गया। कक्षा दो में पढ़े वाला बड़ा बेटा साइकिल से स्कूल पहुंचा। स्कूल में तीनों को छोड़कर वह घर चले आए और दुकान पर चले गए।
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10:13 बजे के करीब स्कूल से फोन कर बच्चे की बेहोशी की बात बताई गई तो वह स्तब्ध रह गए। वह एक जानने वाले को दुकान पर बैठाकर सीधे स्कूल पहुंचे। वहां बेटा बेदम था। स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि वह बेहोश है।

वह बेटे को शिक्षिका के साथ स्कूटी पर लेकर पहले खान चौराहे पर एक डॉक्टर और फिर डॉक्टर आलम के पास ले गए। वहां से उन्हें चिल्ड्रेन अस्पताल जाने को कहा गया। इसके बाद रास्ते में हेज मेमोरियल अस्पताल पड़ा तो वहां बेटे को ले गए।

डॉक्टर ने देखते ही कह दिया कि बच्चे को ले जाइए। मैंने देखा तो बच्चे की सांसें नहीं चल रही थीं। तब तक वहां प्रिंसिपल का बेटा भी आ गया और फिर वह शिक्षिका के साथ उनके बेटे को चिल्ड्रेन अस्पताल ले गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।


ठीक एक महीने पहले कराया था दाखिला

पिता ने बताया कि 16 अप्रैल को उन्होंने अपने बच्चे का दाखिला इस स्कूल में कराया था। यहां उनका बड़ा बेटा व बेटी पहले से पढ़ते थे, इसलिए ही उन्होंने छोटे बेटे का दाखिला भी यहीं करा दिया। मालूम नहीं था कि हंसते-खेलते बच्चे का यह हाल हो जाएगा। पिता ने कहा कि वह बस इतना चाहते हैं कि उनके मासूम बेटे को इंसाफ मिले।

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