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अर्हता तिथि से प्रमोशन पर सीएजी की ऑडिट आपत्ति
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इविवि के शिक्षकों को अर्हता तिथि से प्रमोशन दिए जाने पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने ऑडिट आपत्ति की है। इस आपत्ति के बाद शिक्षा मंत्रालय एवं यूजीसी ने इविवि से जवाब मांगा है।
हालांकि, इविवि ने स्थिति स्पष्ट करते हुए किसी भी तरह का गलत भुगतान न होने का दावा किया है। लेकिन, इस आपत्ति के बाद शिक्षकों को अर्हता तिथि से प्रमोशन दिए जाने के बजाय आदेश लागू होने की तिथि से प्रमोशन दिया जा रहा है और इसी के अनुरूप भुगतान किया जा रहा है। इविवि प्रशासन को इस मामले में अब यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है।
यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार अगर कोई शिक्षक प्रोफेसर पद के लिए जिस तिथि से अर्ह है, उसी तिथि से उसे पदनाम समेत अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। अगर किसी वजह से चयन समिति की बैठक नहीं हो पाती है तो जब शिक्षक को प्रोन्नत किया जाए तो अर्हता तिथि से ही सभी लाभ दिए जाएं।
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पूर्व कुलपति प्रो. हांगलू के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2017 में इसी रेगुलेशन के तहत तकरीबन 84 शिक्षकों को इसका लाभ दिया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय का ऑडिट करने आई सीएजी टीम ने भुगतान पर आपत्ति लगा दी और भुगतान को गलत बताया। सीएजी की ऑडिट आपत्ति के बाद इविवि में जितने प्रमोशन किए गए, उनमें शिक्षकों को अर्हता तिथि से लाभ देने के बजाय आदेश लागू होने की तिथि से लाभ दिया गया। सीएजी की ऑडिट आपत्ति के आधार पर शिक्षा मंत्रालय ने इविवि से जवाब मांग लिया है। इविवि प्रशासन ने अपना जवाब भेज दिया और मंत्रालय को बताया है कि सीएजी की टीम ने यूजीसी रेगुलेशन के बजाय एआईसीटीई रेगुलेशन को आधार मानकर ऑडिट आपत्ति की है। इविवि प्रशासन को अब यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके कि शिक्षकों की अर्हता तिथि से लाभ दिया जाना है या आदेश लागू होने की तिथि से यह लाभ प्रदान किया जाना है।
सीएजी टीम ने यूजीसी रेगुलेशन के बजाय एआईसीटीई रेगुलेशन को आधार मानकर ऑडिट किया और आपत्ति दर्ज की। जबकि इविवि का संचालन यूजीसी रेगुलेशन के तहत किया जाता है। किसी तरह का गलत प्रमोशन या भुगतान नहीं हुआ है। मामले में विवि ने मंत्रालय और यूजीसी को जवाब भेज दिया है। डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र, पीआरओ, इविवि
अर्हता तिथि निर्धारण के लिए बनी कमेटी
इविवि में अर्हता तिथि निर्धारण के लिए डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एके राय की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है। इसमें डीन कॉलेज डेवलपमेंट प्रो. प्रशांत अग्रवाल एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह को बतौर सदस्य शामिल किया गया है और असिस्टेंट रजिस्ट्रार देवेश गोस्वामी को कन्वीनर बनाया गया है।
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हालांकि, इविवि ने स्थिति स्पष्ट करते हुए किसी भी तरह का गलत भुगतान न होने का दावा किया है। लेकिन, इस आपत्ति के बाद शिक्षकों को अर्हता तिथि से प्रमोशन दिए जाने के बजाय आदेश लागू होने की तिथि से प्रमोशन दिया जा रहा है और इसी के अनुरूप भुगतान किया जा रहा है। इविवि प्रशासन को इस मामले में अब यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है।
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यूजीसी रेगुलेशन के अनुसार अगर कोई शिक्षक प्रोफेसर पद के लिए जिस तिथि से अर्ह है, उसी तिथि से उसे पदनाम समेत अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। अगर किसी वजह से चयन समिति की बैठक नहीं हो पाती है तो जब शिक्षक को प्रोन्नत किया जाए तो अर्हता तिथि से ही सभी लाभ दिए जाएं।
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पूर्व कुलपति प्रो. हांगलू के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2017 में इसी रेगुलेशन के तहत तकरीबन 84 शिक्षकों को इसका लाभ दिया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय का ऑडिट करने आई सीएजी टीम ने भुगतान पर आपत्ति लगा दी और भुगतान को गलत बताया। सीएजी की ऑडिट आपत्ति के बाद इविवि में जितने प्रमोशन किए गए, उनमें शिक्षकों को अर्हता तिथि से लाभ देने के बजाय आदेश लागू होने की तिथि से लाभ दिया गया। सीएजी की ऑडिट आपत्ति के आधार पर शिक्षा मंत्रालय ने इविवि से जवाब मांग लिया है। इविवि प्रशासन ने अपना जवाब भेज दिया और मंत्रालय को बताया है कि सीएजी की टीम ने यूजीसी रेगुलेशन के बजाय एआईसीटीई रेगुलेशन को आधार मानकर ऑडिट आपत्ति की है। इविवि प्रशासन को अब यूजीसी से दिशा-निर्देश मिलने का इंतजार है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके कि शिक्षकों की अर्हता तिथि से लाभ दिया जाना है या आदेश लागू होने की तिथि से यह लाभ प्रदान किया जाना है।
सीएजी टीम ने यूजीसी रेगुलेशन के बजाय एआईसीटीई रेगुलेशन को आधार मानकर ऑडिट किया और आपत्ति दर्ज की। जबकि इविवि का संचालन यूजीसी रेगुलेशन के तहत किया जाता है। किसी तरह का गलत प्रमोशन या भुगतान नहीं हुआ है। मामले में विवि ने मंत्रालय और यूजीसी को जवाब भेज दिया है। डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र, पीआरओ, इविवि
अर्हता तिथि निर्धारण के लिए बनी कमेटी
इविवि में अर्हता तिथि निर्धारण के लिए डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एके राय की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है। इसमें डीन कॉलेज डेवलपमेंट प्रो. प्रशांत अग्रवाल एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. रामेंद्र कुमार सिंह को बतौर सदस्य शामिल किया गया है और असिस्टेंट रजिस्ट्रार देवेश गोस्वामी को कन्वीनर बनाया गया है।