बुलेट ट्रेन: टेंडर प्रक्रिया में जापानी तकनीक इस्तेमाल करेगा रेलवे
अभी रेलवे के सभी मंडलों द्वारा तमाम कार्यों के लिए टेंडर निकाले जाते हैं। इसमें 21 दिन से एक महीने का समय रहता है। उसके बार आईआरईपीएस (इंडियन रेलवे ई-प्रोक्यारमेंट सिस्टम) पर टेंडर अपलोड करने के बाद उसे निर्धारित समय बाद उसे खोला जाता है।
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जापान के सहयोग से देश में बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा रेलवे अब टेंडर कार्यों में भी जापानी तकनीक का सहारा लेगा। उत्तर मध्य रेलवे समेत समस्त जोनल रेलवे द्वारा अब ई-ऑक्शन के जरिये टेंडर प्रक्रिया संपन्न होगी। इस तकनीक का अभी जापान के ही सरकारी कार्यों में प्रचलन है। एनसीआर के प्रयागराज मंडल समेत सभी तीनों मंडलों में यह तकनीक अपनाए जाने के बाद टेंडर से जुड़ी लंबी प्रक्रिया अब कुछ दिनों में ही पूरी हो जाएंगी। इससे जहां एक ओर रेलवे द्वारा आधारभूत संरचना को लेकर किए जा रहे कार्य जल्द पूरे होंगे तो वहीं दूसरी ओर रेलवे के तमाम टेंडरों पर वर्चस्व जमा चुके पुराने ठेकेदारों की भी मनमानी नहीं चल सकेगी।
दरअसल अभी रेलवे के सभी मंडलों द्वारा तमाम कार्यों के लिए टेंडर निकाले जाते हैं। इसमें 21 दिन से एक महीने का समय रहता है। उसके बार आईआरईपीएस (इंडियन रेलवे ई-प्रोक्यारमेंट सिस्टम) पर टेंडर अपलोड करने के बाद उसे निर्धारित समय बाद उसे खोला जाता है, उसके बाद उसे टेंडर के लिए गठित कमेटी के पास भेज दिया जाता है। वहां उच्च बोलीदाता को ही टेंडर दिए जाने की स्वीकृति दी जाती है। इस पूरे कार्य में तीन से छह महीने का वक्त लग जाता है।
फिलहाल अब नए सिस्टम से सिर्फ वित्तीय योग्यता ही मानक होगी। इसमें आईआरईपीएस की वेबसाइट पर ई-ऑक्शन माड्यूल पर ही नए एवं पुराने ठेकेदारों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। संबंधित रेल मंडल द्वारा अपने सभी कार्यों का विवरण ई-ऑक्शन में लोड किया जाएगा। इसमें जो रजिस्टर्ड ठेकेदार होंगे उनके पास स्वत: नोटिफिकेशन पहुंच जाएगा। उन्हें 12 दिन का समय दिया जाएगा। फिर संबंधित ठेके की ऑनलाइन बोली लगेगी। यह प्रक्रिया महज एक घंटे की ही होगी।
न्यूनतम बोली को रखा जाएगा गोपनीय
इस प्रक्रिया में किसी को भी मालूम नहीं पड़ेगा कि किसने कितने की बोली लगाई। न्यूतनम बोली क्या होगी उसे रेलवे गोपनीय रखेगा। ठेकेदारों को अपने विवेक से ही कार्य को देखते हुए इसकी बोली लगानी होगी। इस दौरान जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा, उसे ऑटोमेटिक सिस्टम द्वारा ठेका आवंटित हो जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया महज 15 दिन में ही निपट जाएगी। प्रयोग के तौर पर दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी समेत कुल 11 रेल मंडलों में ई-ऑक्शन के तहत अभी कुल तीन तरह के ठेके वाहन पार्किंग, नॉन फेयर रेवेन्यू का टेंडर और एसएलआर कोच को लीज पर देने का है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इसका विस्तार होने के साथ सभी जोनल रेलवे में लागू कर दिया जाएगा।
अभी देश के कुल 11 रेल मंडलों में इसे लागू किया गया है। रेलवे बोर्ड की इस संबंध में आगे जो भी गाइडलाइन आएगी, उसका पूरा पालन किया जाएगा। - डॉ. अमित मालवीय, सीनियर पीआरओ, एनसीआर