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बीटीसी प्रशिक्षुओं के प्रमाण पत्रों की होगी जांच

Wed, 26 Aug 2015 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 26 Aug 2015 01:46 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। बीटीसी-2013 में प्रवेश लेने वाले प्रदेश भर के सभी प्रशिक्षुओं के प्रमाण पत्रों की जांच करवाई जाएगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सवेन्द्र विक्रम सिंह ने डायट इलाहाबाद में बड़े पैमाने पर बीटीसी प्रवेश में धांधली पकड़े जाने पर यह आदेश दिया है। डायट इलाहाबाद में अब तक लखनऊ विश्वविद्यालय, बिहार शिक्षा बोर्ड एवं भीम राव अंबेडकर विवि आगरा से फर्जी अंकपत्र लगाकर बीटीसी में प्रवेश का मामला सामने आने के बाद यह जांच का आदेश दिया गया है।
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जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) इलाहाबाद में प्रवेश लेने वाले सभी प्रशिक्षुओं के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट एवं स्नातक के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए संबंधित बोर्ड को भेजा गया था। पहले चरण में जांच के बाद आठ प्रशिक्षुओं ने लखनऊ विवि की स्नातक की फर्जी मार्कशीट लगाकर प्रवेश लिया था। डायट प्राचार्य डीकेसिंह ने इन प्रशिक्षुओं का प्रवेश निरस्त करने केसाथ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
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डायट इलाहाबाद में बीटीसी-2013 में प्रवेश लेने वाले छह प्रशिक्षुओं ने हाईस्कूल के साथ स्नातक परीक्षा के अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र फर्जी लगाए हैं। डायट प्राचार्य डीकेसिंह ने बताया कि इलाहाबाद के तुलारामबाग के भारत भूषण, फाफामऊ बाजार के हिमांशु केसरवानी, झूंसी कोहना की चंदा मिश्रा, मालवीय नगर के विनय कुमार श्रीवास्तव, पुष्पांजलि नगर भावापुर की गायत्री ने 10वीं बिहार शिक्षा बोर्ड एवं स्नातक परीक्षा लखनऊ विवि से पास करने की जाली मार्कशीट लगाई है। इसके साथ ही मरदानपुर मनौरी के संजीव कुमार यादव बिहार शिक्षा बोर्ड से हाईस्कूल एवं स्नातक परीक्षा भीमराव अंबेडकर विवि आगरा से पास करने का फर्जी अंकपत्र लगाया है।
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डायट इलाहाबाद में बीटीसी प्रवेश में फर्जीवाड़ा करने वालों ने एक ही जगह से हाईस्कूल एवं स्नातक का जाली प्रमाण पत्र तैयार करवाया है। इससे साफ पता चल रहा है कि शहर में ही कहीं जाली प्रमाण पत्र तैयार करने वालों का रैकेट काम कर रहा है। डायट प्रधानाचार्य ने बताया कि अभी इन प्रशिक्षुओं की 12वीं की मार्कशीट का सत्यापन पूरा नहीं हुआ है। इसके जांच के बाद नए तथ्य सामने आएंगे।

डायट प्राचार्य डीके सिंह का कहना है कि पहले चरण में जांच के बाद लखनऊ विवि की फर्जी मार्कशीट पकड़े जाने के बाद उन्होंने सिविल लाइंस थाने में 24 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए प्रार्थना पत्र भेजा। थाने से प्रार्थना पत्र एसएसपी कार्यालय भेजा गया, वहां भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने एसएसपी से प्राथमिकी दर्ज करवाने की मांग की है।


बीटीसी प्रशिक्षुओं के प्रमाण पत्रों की जांच के लिए संबंधित बोर्ड एवं विश्वविद्यालय मोटी फीस वसूल करते हैं। इसकेलिए शासन पैसे की अलग से व्यवस्था करे। किसी भी अभ्यर्थी से प्रमाण पत्र की जांच के लिए शुल्क वसूल करने पर हंगामा होने लगता है।
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