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एमएनएनआईटी में भविष्य के ईंधन पर मंथन
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Brainstorming on future fuel starts in MNNIT
- फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में डायमंड जुबली समारोह के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से तीन दिवसीय ‘बायोसंगम-2020’ की शुरुआत की गई। पहले दिन विभिन्न देशों और अन्य शिक्षाविदों के प्रख्यात शोधकर्ताओं ने अपने शोध का प्रदर्शन किया। इस दौरान भविष्य के ईंधन पर भी मंथन किया गया।
‘वैज्ञानिक विकास के लिए जैव प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में एक हजार से अधिक छात्र और 150 शिक्षाविद शामिल होंगे। सम्मेलन के पहले दिन विश्वविद्यालय डी पेरिस, फ्रांस के प्रो. एरिक ने ठोस अपशिष्ट उपचार विधियों पर चर्चा की। एमेरिटस प्रो. पीके गुप्ता (सीसीएस मेरठ) ने फसल प्रजनन में जैव प्रौद्योगिकी के महत्व से अवगत कराया। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. देवव्रत दास ने भविष्य के ईंधन पर चर्चा की। ऐबरिस्टविद विश्वविद्यालय, यूके के प्रो. रतन यादव ने क्रॉप प्रजनन के भविष्य के पहलुओं पर चर्चा की। बीएचयू के प्रो. एनके दुबे, कंसस स्टेट यूनिवर्सिटी, मैनहट्न के प्रो. रोमन, आईआईटी खड़गपुर के प्रो. रिंटू बनर्जी, एचपीयू शिमला के प्रो. एसएस कंवर ने भी विषय पर विचार प्रस्तुत किए। इससे पूर्व एमएनएनआईटी के कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे समेत डॉ. एरिक हल्लेबस, प्रो. पीके गुप्ता, डॉॅ. एनके सिंह ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।
मराठी में स्वागत, हिंदी के महत्व पर चर्चा
प्रयागराज। एमएनएनआईटी में मातृभाषा दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान में अलग-अलग प्रांतों से संबंधित छात्रों एवं शिक्षकों ने अपनी-अपनी मातृभाषा की उपयोगिता एवं महत्व पर चर्चा की। कुछ टेक्नोक्रेट्स ने लघु नाटिका के माध्यम से मातृभाषा एवं अंग्रेजी भाषा का महत्व बताया। इससे पूर्व संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे, मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नीरज तिवारी विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश, डीन शोध एवं परामर्श प्रो. गीतिका, विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश पांडेय, प्रो. रवि प्रकाश तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन से संगोष्ठी की शुरुआत की। कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे ने अपनी मातृभाषा मराठी में आए हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। वहीं, मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने मातृभाषा हिंदी की उपयोगिता की चर्चा करते हुए कहा कि भारत विविध संस्कृति एवं भाषा का देश रहा है। संचालन प्रमोद कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक तिवारी ने किया।
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‘वैज्ञानिक विकास के लिए जैव प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में एक हजार से अधिक छात्र और 150 शिक्षाविद शामिल होंगे। सम्मेलन के पहले दिन विश्वविद्यालय डी पेरिस, फ्रांस के प्रो. एरिक ने ठोस अपशिष्ट उपचार विधियों पर चर्चा की। एमेरिटस प्रो. पीके गुप्ता (सीसीएस मेरठ) ने फसल प्रजनन में जैव प्रौद्योगिकी के महत्व से अवगत कराया। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. देवव्रत दास ने भविष्य के ईंधन पर चर्चा की। ऐबरिस्टविद विश्वविद्यालय, यूके के प्रो. रतन यादव ने क्रॉप प्रजनन के भविष्य के पहलुओं पर चर्चा की। बीएचयू के प्रो. एनके दुबे, कंसस स्टेट यूनिवर्सिटी, मैनहट्न के प्रो. रोमन, आईआईटी खड़गपुर के प्रो. रिंटू बनर्जी, एचपीयू शिमला के प्रो. एसएस कंवर ने भी विषय पर विचार प्रस्तुत किए। इससे पूर्व एमएनएनआईटी के कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे समेत डॉ. एरिक हल्लेबस, प्रो. पीके गुप्ता, डॉॅ. एनके सिंह ने सम्मेलन का उद्घाटन किया।
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मराठी में स्वागत, हिंदी के महत्व पर चर्चा
प्रयागराज। एमएनएनआईटी में मातृभाषा दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान में अलग-अलग प्रांतों से संबंधित छात्रों एवं शिक्षकों ने अपनी-अपनी मातृभाषा की उपयोगिता एवं महत्व पर चर्चा की। कुछ टेक्नोक्रेट्स ने लघु नाटिका के माध्यम से मातृभाषा एवं अंग्रेजी भाषा का महत्व बताया। इससे पूर्व संस्थान के कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे, मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नीरज तिवारी विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश, डीन शोध एवं परामर्श प्रो. गीतिका, विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश पांडेय, प्रो. रवि प्रकाश तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन से संगोष्ठी की शुरुआत की। कार्यवाहक निदेशक प्रो. एमएम गोरे ने अपनी मातृभाषा मराठी में आए हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया। वहीं, मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने मातृभाषा हिंदी की उपयोगिता की चर्चा करते हुए कहा कि भारत विविध संस्कृति एवं भाषा का देश रहा है। संचालन प्रमोद कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक तिवारी ने किया।
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