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अध्यक्ष के खिलाफ आंदोलन में फूंक गए करोड़ों
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Wed, 01 Apr 2015 11:53 PM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के खिलाफ हुए उग्र आंदोलनों में विगत दो वर्ष में करोड़ों रुपये खाक हो गए। इस दौरान हुई आगजनी में एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ पुलिस विभाग को दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। रोडवेज, व्यापारियाें तथा आम लोगों की इससे कई गुना अधिक संपत्ति नुकसान हो गई। इतना ही नहीं इन आंदोलनाें की वजह से प्रभावित क्षेत्रों में 30 से अधिक दिन दुकानें भी बंद रहीं। इससे करोड़ों का व्यापारिक लेन-देन प्रभावित रहा।
डॉ. अनिल को चार्ज संभाले बृहस्पतिवार को दो साल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद 2013 में 27 मई को उन्होंने आयोग की भर्तियों में त्रिस्तरीय आरक्षण लागू करने का आदेश जारी किया। इसके विरोध में 15 जुलाई को उग्र आंदोलनाें की शुरुआत हुई। इस दिन छात्रों और प्रतियोगियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसमें सिविल लाइंस बस अड्डे के पास कई बसों में तोड़फोड़ की। बड़ी संख्या में छात्र बस अड्डा परिसर में भी घुस गए तथा दर्जनाें बसों में तोड़फोड़ की। इस आगजनी में कई माल, दुकानों पर भी पत्थरबाजी की जिससे काफी नुकसान हुआ। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने सड़क के किनारे खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की। इसके बाद जुलाई में दो मौके और आए जब लाखों रुपये की संपत्ति बवाल और आगजनी की भेंट चढ़ गई। इस बवाल के बाद आयोग ने आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी लेकिन प्रतियोगियों का आंदोलन इसके बाद भी समाप्त नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर तेज आंदोलन शुरू कर दिया।
इतना ही नहीं फैसला वापस लेने के विरोध में आरक्षण समर्थकों ने भी बवाल शुरू कर दिया। उनकी ओर से 17 सितंबर को महापंचायत की घोषणा की गई। महापंचायत जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी संबोधित करना था लेकिन दोनों नेताओं को एक दिन पहले रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं, प्रतियोगियों को भी जगह-जगह रोक लिया गया तथा गिरफ्तार किया गया। इसके विरोध में शहर ही नहीं गांवों में भी जमकर आगजनी हुई। इस दौरान प्रतियोगियों ने कई बस, पुलिस की गाड़ी तोड़ दी। यह तांडव यहीं समाप्त नहीं हुआ। महापंचायत नहीं करने देने तथा नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में उनका कई दिनों तक उग्र प्रदर्शन हुआ। इस दौरान कई ऐसे मौके भी आए जब प्रतियोगियों के दोनों गुट आमने-सामने आए। इस टकराव में सिविल लाइंस के अलावा छोटा बघाड़ा, सलोरी आदि मोहल्लों में कई दुकानों और बसाें में तोड़फोड़ हुई तो पूरे शहर में तनाव भी बना रहा।
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छोटी-बड़ी घटनाओं के बाद पिछले साल दो जनवरी को एक फिर पूरा शहर आयोग अध्यक्ष के खिलाफ शुरू आंदोलनों की आग में जला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे अनशन के समर्थन में दो जनवरी को भारी भीड़ जुटी। इस दौरान नोकझोंक के बाद पुलिस परिसर में घुसकर छात्रों और प्रतियोगियों की जमकर धुनाई की। इसके विरोध में छात्रों और प्रतियोगियों ने पूरे शहर में तोड़फोड़, आगजनी की। इसमें बस, दुकान, निजी वाहन आदि तो तोड़ ही दिए गए कई राहगीर घायल भी हो गए। छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह तांडव तीन और चार जनवरी को भी जारी रहा। इसके बाद भी समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होता रहा। आयोग अध्यक्ष के खिलाफ छात्रों और प्रतियोगियों का आंदोलन चल ही रहा था कि पेपर लीक होने के बाद इसमें एक फिर तेजी आ गई है और पिछले चार दिन में ही चार बसों को आग के हवाले कर दिया गया है। कई बसों तथा पीएससी के वाहन में छात्रों ने तोड़फोड़ की। अभी यह आंदोलन जारी है और तनाव को देखते हुए बवाल की आशंका बनी हुई है।
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डॉ. अनिल को चार्ज संभाले बृहस्पतिवार को दो साल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद 2013 में 27 मई को उन्होंने आयोग की भर्तियों में त्रिस्तरीय आरक्षण लागू करने का आदेश जारी किया। इसके विरोध में 15 जुलाई को उग्र आंदोलनाें की शुरुआत हुई। इस दिन छात्रों और प्रतियोगियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसमें सिविल लाइंस बस अड्डे के पास कई बसों में तोड़फोड़ की। बड़ी संख्या में छात्र बस अड्डा परिसर में भी घुस गए तथा दर्जनाें बसों में तोड़फोड़ की। इस आगजनी में कई माल, दुकानों पर भी पत्थरबाजी की जिससे काफी नुकसान हुआ। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने सड़क के किनारे खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की। इसके बाद जुलाई में दो मौके और आए जब लाखों रुपये की संपत्ति बवाल और आगजनी की भेंट चढ़ गई। इस बवाल के बाद आयोग ने आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी लेकिन प्रतियोगियों का आंदोलन इसके बाद भी समाप्त नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर तेज आंदोलन शुरू कर दिया।
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इतना ही नहीं फैसला वापस लेने के विरोध में आरक्षण समर्थकों ने भी बवाल शुरू कर दिया। उनकी ओर से 17 सितंबर को महापंचायत की घोषणा की गई। महापंचायत जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी संबोधित करना था लेकिन दोनों नेताओं को एक दिन पहले रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं, प्रतियोगियों को भी जगह-जगह रोक लिया गया तथा गिरफ्तार किया गया। इसके विरोध में शहर ही नहीं गांवों में भी जमकर आगजनी हुई। इस दौरान प्रतियोगियों ने कई बस, पुलिस की गाड़ी तोड़ दी। यह तांडव यहीं समाप्त नहीं हुआ। महापंचायत नहीं करने देने तथा नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में उनका कई दिनों तक उग्र प्रदर्शन हुआ। इस दौरान कई ऐसे मौके भी आए जब प्रतियोगियों के दोनों गुट आमने-सामने आए। इस टकराव में सिविल लाइंस के अलावा छोटा बघाड़ा, सलोरी आदि मोहल्लों में कई दुकानों और बसाें में तोड़फोड़ हुई तो पूरे शहर में तनाव भी बना रहा।
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छोटी-बड़ी घटनाओं के बाद पिछले साल दो जनवरी को एक फिर पूरा शहर आयोग अध्यक्ष के खिलाफ शुरू आंदोलनों की आग में जला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे अनशन के समर्थन में दो जनवरी को भारी भीड़ जुटी। इस दौरान नोकझोंक के बाद पुलिस परिसर में घुसकर छात्रों और प्रतियोगियों की जमकर धुनाई की। इसके विरोध में छात्रों और प्रतियोगियों ने पूरे शहर में तोड़फोड़, आगजनी की। इसमें बस, दुकान, निजी वाहन आदि तो तोड़ ही दिए गए कई राहगीर घायल भी हो गए। छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह तांडव तीन और चार जनवरी को भी जारी रहा। इसके बाद भी समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होता रहा। आयोग अध्यक्ष के खिलाफ छात्रों और प्रतियोगियों का आंदोलन चल ही रहा था कि पेपर लीक होने के बाद इसमें एक फिर तेजी आ गई है और पिछले चार दिन में ही चार बसों को आग के हवाले कर दिया गया है। कई बसों तथा पीएससी के वाहन में छात्रों ने तोड़फोड़ की। अभी यह आंदोलन जारी है और तनाव को देखते हुए बवाल की आशंका बनी हुई है।