अजब रेल की गजब कहानी : 6503 किलोमीटर का सफर करने के बाद 12वें दिन मिली बाइक, रेलवे बोर्ड तक पहुंचा मामला
इस लापरवाही को रेलवे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में रेलवे ने जांच भी बैठा दी है। कहा जा रहा है कि रेलवे बोर्ड तक मामला पहुंच जाने की वजह से रेल प्रशासन द्वारा लापरवाही बरतने वाले रेलकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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मांडा के एक युवक द्वारा बहन की शादी में उपहार देने के लिए मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल से प्रयागराज छिवकी के लिए बुक कराई गई बाइक 12 वें दिन यहां पहुंच सकी। रेलवे की लापरवाही की वजह से 1338 किमी की बजाय बुक कराई गई बाइक दो बार पटना एवं तीन दिन गोवा में रहने के बाद कुल 6503 किमी का सफर तय करके यहां पहुंची।
इस लापरवाही को रेलवे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में रेलवे ने जांच भी बैठा दी है। कहा जा रहा है कि रेलवे बोर्ड तक मामला पहुंच जाने की वजह से रेल प्रशासन द्वारा लापरवाही बरतने वाले रेलकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मुंबई में रहने वाले मांडा के रामकुमार यादव ने गत 11 मई को बहन की शादी में उपहार देने के लिए बाइक की बुकिंग कराई। बाइक 13202 लोकमान्य तिलक-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस के एसएलआर कोच में लोड की गई। 12 मई की दोपहर प्रयागराज छिवकी में बाइक को उतारना था। पांच मिनट का ठहराव होने के बाद भी छिवकी में बाइक उतारी नहीं जा सकी और ट्रेन के साथ बाइक पटना पहुंच गई।
प्रयागराज के बजाय गोवा पहुंच गई थी बाइक
रामकुमार ने जब इसकी शिकायत की तो बताया गया कि 12742 पटना-वास्को द गामा एक्सप्रेस से उनकी बाइक शनिवार 13 मई की शाम यहां आ जाएगी। उसकेे बुजुर्ग पिता रामलाल 13 मई को छिवकी पहुंचे तो उन्हें बाइक नहीं मिली। मालूम पड़ा कि बाइक यहां उतारी ही नहीं गई और वह वास्को द गामा पहुंच गई। तब बताया गया कि बाइक शुक्रवार 19 मई को उसी ट्रेन से प्रयागराज छिवकी आएगी।
रामलाल शुक्रवार की सुबह तीसरी बार छिवकी पहुंच गए। सुबह ट्रेन 4.45 बजे आई, लेकिन यहां एक बार फिर बाइक नहीं उतारी गई। इस पूरी लापरवाही पर उनके बेटे ने ट्वीट के माध्यम से रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव एवं अन्य वरिष्ठ अफसरों से शिकायत की। इस बीच रामकुमार भी शुक्रवार को मुंबई से प्रयागराज के लिए चल दिया। वह शनिवार दोपहर प्रयागराज छिवकी पहुंचा। कुछ देर में उसके पिता भी वहां पहुंच गए।
यहां स्टेशन पर बताया गया कि पटना से वास्को द गामा एक्सप्रेस में उसकी बाइक लोड की गई है। रात 8.30 बजे ट्रेन छिवकी पहुंची। उसके एसएलआर कोच से यहां बाइक उतारी गई। इस दौरान ट्रेन यहां दो मिनट की बजाय 30 मिनट रोकी गई। कागजात दिखाने के बाद बाइक युवक और उसके पिता को सौंप दी गई
इस पूरे मामले में जांच बिठा दी गई है। उसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। युवक को बाइक सौंप दी गई है। - अमित सिंह, पीआरओ, प्रयागराज मंडल।
रेलकर्मियों के अच्छे व्यवहार से युवक गदगद
रेलमंत्री तक बाइक का मामला ट्वीट से पहुंच जाने की वजह शनिवार की शाम छिवकी रेलवे स्टेशन पर पहुंचे रामकुमार और उसके पिता रामलाल रेलकर्मियों के अच्छे व्यवहार से गदगद हो गए। रामकुमार ने कहा कि अगर यही काम 12 मई को कर दिया गया होता तो वह 17 मई को अपनी बहन की शादी पर बाइक उपहार के रूप में दे देते। उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने यह मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया, नहीं तो बाइक शायद शनिवार को भी न मिलती।