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बरेली के कल्चर की यादगार दिल में समा विहार को रवाना हो गये 57 प्रवासी मदजूर, 42 दिनों बाद गये प्रवासियों के मुख पर दिखी मुस्कान,

Tue, 12 May 2020 12:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2020 12:39 AM IST
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Bihar labour go to home
घर भिजवाने की मांग को अमर उजाला में छापने पर आभार जताया
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मीरगंज। क्षेत्र के स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में बने शेल्टर होम में 42 दिन तक ठहरे बिहार राज्य के प्रवासी मजदूरों को मेडिकल परीक्षण बाद नायब तहसीलदार ने रोडवेज बसों से उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना करा दिया। घर जाने की खुशी में उन्होंने अमर उजाला का आभार जताया कि अखबार ने उनकी समस्या को प्रमुखता से उठाया।
स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में बने शेल्टर होम के अलावा अन्य स्थानों पर भी बीती 31 मार्च से बिहार राज्य के प्रवासी मजदूर ठहरे हुए थे लेकिन उनके साथ उत्तर प्रदेश के रहने वाले मजदूरों को 14 दिनों के क्वारंटीन के बाद 15 अप्रैल को राशन किट देकर बसों से रवाना कर दिया गया था। परंतु तीनों शेल्टर होम में ठहरे बिहार के प्रवासी 29 मजदूरों को स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में ही रोक लिया गया। जोकि 42 दिन से इसी कॉलेज में क्वारंटीन थे। उन्होंने शनिवार दोपहर में आमरण अनशन शुरू करते हुए घर भेजे जाने की मांग की। रविवार को भी शाम को भोजन न करते हुए उन्होंने अपनी मांग दोहराई। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। इसे प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए सोमवार को रोडवेज बसों से उत्तर प्रदेश और बिहार बार्डर तक भेजे जाने का निर्णय लिया।
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दोपहर में नायब तहसीलदार लक्की सिंह शेल्टर होम पहुंचीं और उन्होंने सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर दोपहर का भोजन कराकर 57 प्रवासियों को रवाना कर दिया। लेकिन एक बात की तहसील प्रशासन ने अनदेखी कर दी कि शेल्टर होम से गोरखपुर मंडल के कुशीनगर जनपद बार्डर की तकरीबन दूरी 700 किलो मीटर है और इतनी दूरी बस से तय करने में तकरीबन 18 घंटे लगने का अनुमान है फिर भी प्रवासियों को प्रशासन ने 42 दिन तक तो पूरे संसाधन मुहैया कराए लेकिन जाते वक्त उन्हें एक समय का भोजन और रास्ते के लिए पानी की बोतल नहीं दी। यहां तक कि रोडवेज बस चालक व परिचालक को भी भोजन व पानी की व्यवस्था शेल्टर होम से नहीं की गई।
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सेल्फी लेकर बोले, यहां के लोग अच्छे हैं
सोमवार को एसडीआईसी कॉलेज के शेल्टर होम से अपने राज्य को रवाना होने से कुछ समय पहले युवा प्रवासियों ने यहां की प्राकृतिक छटा के साथ सेल्फी लेकर यादगार बनाया। जनपद सुपौल के रहने वाले प्रभाष कुमार अपने साथ के 23 लोगों और मोतीहारी के निप्पू कुमार के साथ बोले कि यहां के लोगों की सभ्यता और भाईचारा बिहार से काफी अच्छा है। यहां बहुत अच्छा लगा। हम इसे कभी नहीं भूलेंगे।
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