High Court : मृतक आश्रित के मुआवजा आवेदन पर एक माह में फैसला लें बांदा के डीएम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा के डीएम को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजे की मांग करने वाले एक किसान के आवेदन पर एक महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा के डीएम को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजे की मांग करने वाले एक किसान के आवेदन पर एक महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल निर्धारित समयसीमा का उल्लंघन आवेदन को अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकता। अधिकारियों को मृतक के आश्रितों के मुआवजा आवेदनों पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने केदार नाथ साहू की याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की थी कि बांदा के डीएम उसके मुआवजे के आवेदन पर विचार करने का निर्देश दें। अधिवक्ता सुनील श्रीवास्तव ने दलील दी कि याची किसान है। उसके पिता की आकस्मिक मृत्यु हो गई है। उसने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मुआवजे के लिए आवेदन किया था जो डीएम के समक्ष लंबित है।
राज्य के स्थायी वकील दलील दी कि योजना के तहत आवेदन देने की समयसीमा दुर्घटना की तारीख से एक महीने है। याची ने कथित दुर्घटना के एक वर्ष की समाप्ति के बाद आवेदन दिया है। कोर्ट ने डीएम को निर्देश दिया कि वे इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से एक महीने की अवधि के भीतर याचिकाकर्ता के लंबित आवेदन का गुण-दोष के आधार पर निपटारा करें।