बहादुरगंज अग्निकांड : छह घंटे में 40 फेरे लगाकर आग पर काबू पा सकीं दमकल की दस गाड़ियां
फायर ब्रिगेड अफसरों के मुताबिक उन्हें घटना की सूचना 9:51 मिनट पर मिली। 15 मिनट में टीम मौके पर पहुंच गई थी। सबसे पहले पांच हजार लीटर का फायर टेंडर लेकर टीम पहुंची। इसके बाद 20 हजार लीटर के फायर टेंडर के साथ ही सिविल लाइंस फायर स्टेशन से तीन अन्य गाड़ियां भी बुलाई गईं।
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व्यापारी के घर लगी भीषण आग को बुझाने में फायर ब्रिगेड के जवान छह घंटे तक लगातार जूझते रहे। हाल यह रहा है कि राहत कार्य में दमकल की 10 गाड़ियां लगानी पड़ीं। इन्हें 40 फेरे लगाने पड़े। शहर से ही नहीं बल्कि नैनी, हंडिया व सोरांव फायर स्टेशन से भी दमकल की गाड़ियां मंगवानी पड़ीं। छह घंटे तक लगातार जूझने के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
फायर ब्रिगेड अफसरों के मुताबिक उन्हें घटना की सूचना 9:51 मिनट पर मिली। 15 मिनट में टीम मौके पर पहुंच गई थी। सबसे पहले पांच हजार लीटर का फायर टेंडर लेकर टीम पहुंची। इसके बाद 20 हजार लीटर के फायर टेंडर के साथ ही सिविल लाइंस फायर स्टेशन से तीन अन्य गाड़ियां भी बुलाई गईं। तब तक एक घंटे का समय हो चुका था, लेकिन आग फैलती ही जा रही थी।
भयावहता को देखते हुए नैनी, हंडिया व सोरांव फायर स्टेशन से भी दमकल की दो-दो गाड़ियां मंगवाई गईं। इसके बाद 10 गाड़ियों से एक साथ आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू हुए। इन गाड़ियों ने पानी भरने के लिए 40 से ज्यादा राउंड लगाए। फायर स्टेशन अफसर सिविल लाइंस अविनाश चौरसिया ने बताया कि सिविल लाइंस फायर स्टेशन से चार, जबकि आसपास के तीन फायर स्टेशनों से छह गाड़ियां बुलाई गईं। प्रत्येक ने कम से कम चार राउंड पानी भरे और लगातार छह घंटों तक राहत कार्य चलता रहा।
100 फीट लंबाई, रास्ता बेहद संकरा
व्यापारी के जिस मकान में आग लगने की घटना हुई, उसकी बनावट के चलते भी राहत कार्य में दिक्कतें आईं। दरअसल, मकान की लंबाई लगभग 100 फीट थी। भीतर सामान भरा होने के कारण पीछे की ओर जाने के लिए रास्ता बेहद संकरा था। भारी मात्रा में दोना पत्तल व अन्य सामान आग की चपेट में आने से भीतर का तापमान बेहद ज्यादा हो गया था और यह भी एक वजह रही कि आग पर पूरी तरह से काबू पाने में इतना वक्त लग गया।
...तो खाक हो जाती बाजार
घटना के बाद इस बात की भी चर्चा रही कि राहत कार्य में कोई भी चूक होती तो बाजार खाक हो सकती थी। दरअसल, बताशा मंडी में जिस जगह यह घटना हुई, वहां अलग-अलग सामान का थोक बाजार है। दोना-पत्तल कारोबारी विनोद के अगल बगल के मकानों में भी किराना समेत अन्य सामान की थोक दुकानें हैं। ज्यादातर मकानों में ही व्यापारियों ने गोदाम बना रखा है। ऐसे में समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो नुकसान कई गुना ज्यादा हो सकता था।