रिसर्च : पानी में रोशनी पड़ते ही खत्म हो जाएगा बैक्टीरिया,जिंक ऑक्साइड क्वांटम डॉट्स का कमाल
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर समेत वैज्ञानिकों ने 2-6 नैनोमीटर के जिंक ऑक्साइड क्वांटम डॉट्स तैयार किए हैं। दावा है कि सामान्य रोशनी में ये करीब 400 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित कर सकते हैं, जिससे बैक्टीरिया नियंत्रण की नई तकनीक विकसित होने की उम्मीद है।
विस्तार
वैज्ञानिकों ने नई पद्धति से अत्यंत सूक्ष्म जिंक ऑक्साइड क्वांटम डॉट्स तैयार किए हैं जो सामान्य रोशनी को पराबैगनी किरणों में परिवर्तित कर देते हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह पानी व अन्य पदार्थों में मौजूद बैक्टीरिया को कुछ ही सेकेंड में नष्ट करने की क्षमता रखता है।
दुनिया के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों में शुमार इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर और वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. टीपी यादव, दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट डॉ. गोविंद दयाल सिंह (इविवि के पूर्व छात्र) व शोधार्थी निकिता के इस शोध को नीदरलैंड के प्रतिष्ठित जर्नल ‘सिरैमिक्स इंटरनेशनल’ ने अपने 24 सितंबर 2026 के अंक में प्रकाशित किया है।
प्रकाश उत्सर्जक उपकरणों के लिए लाभकारी
जिंक ऑक्साइड के अत्यंत सूक्ष्म क्वांटम डॉट्स का आकार मात्र 2 से 6 नैनोमीटर है। इनकी प्रमुख विशेषता लगभग 400 नैनोमीटर तरंगदैर्ध्य पर तीव्र बैगनी प्रकाश उत्सर्जित करना है। यह शोध भविष्य में प्रकाश उत्सर्जक उपकरणों, रासायनिक संवेदकों और जैविक इमेजिंग जैसी तकनीकों के विकास में उपयोगी हो सकता है।
इस तरह तैयार हुए क्वांटम डॉट्स
शोधकर्ताओं ने जिंक ऑक्साइड के क्वांटम डॉट्स तैयार करने के लिए दो तकनीकों हाई एनर्जी बॉल मिलिंग व अल्ट्रासोनिकेशन-लिक्विड फेज एक्सफोलिएशन का संयोजन किया। इस विधि में पहले यांत्रिक प्रक्रिया से पदार्थ के कणों का आकार कम किया गया। फिर अल्ट्रासोनिक तरंगों की सहायता से उन्हें और सूक्ष्म बनाया गया। इस प्रक्रिया से प्राप्त कणों में अच्छी क्रिस्टलीय संरचना और लगभग गोलाकार आकृति पाई गई।
ऐसे करते हैं काम
शोध के अनुसार जब किसी अर्धचालक पदार्थ के कणों का आकार अत्यंत कम हो जाता है, तो उसमें क्वांटम कॉन्फाइनमेंट नामक प्रभाव उत्पन्न होता है। इसके कारण पदार्थ के प्रकाशीय गुणों में परिवर्तन होता है। इस अध्ययन में तैयार किए गए जिंक ऑक्साइड क्वांटम डॉट्स में प्रकाश के अवशोषण और उत्सर्जन के गुणों में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया।
अगले चरण में वायरस पर होगा शोध
इस सफलता के बाद वैज्ञानिकों की टीम अब अगले चरण में वायरस पर जिंक ऑक्साइड क्वांटम डाॅट्स के प्रभाव पर शोध करने जा रही है। डॉ. यादव ने बताया कि वायरस पर शोध के लिए देश में बहुत ही कम प्रयोगशालाएं हैं। सामान्य प्रयोगशाला में इस तरह के शोध नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे वायरस फैलने का खतरा होता है। जल्द ही उच्च स्तरीय लैब में अगले चरण का शोध शुरू किया जाएगा।