{"_id":"5d700c908ebc3e014b5f8f47","slug":"bachca-chor-allahabad-news-ald2540080123","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चा चोरीः थोड़ी हकीकत, शरारतें ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चा चोरीः थोड़ी हकीकत, शरारतें ज्यादा
विज्ञापन
Bachca Chor
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झूठे रहे अधिकांश मामले, अफवाहाें से खतरे में पड़ी निर्दोषों की जान
मनोवैज्ञानिक बोले, ज्यादा गंभीरता से जागरूकता फैलाने की है जरूरत
प्रयागराज। घूरपुर में मंगलवर को 20 वर्षीया अर्धविक्षिप्त महिला को लोगों ने बच्चा चोर कहकर बेरहमी से पीटा। सूचना पर पहुंची पुलिस किसी तरह महिला को छुड़ा कर थाने ले आई और तब जाकर उसकी जान बची। आलम यह रहा कि भीड़ थाने में भी जुट गई। जिसे बाद में समझाकर शांत कराया गया। ठीक ऐसी ही घटनाएं सरायइनायत के कोटवा गांव में एक दिन पहले हुई जहां बच्चा चोर समझकर ग्रामीणों ने मानासिक दिव्यांग को पीट दिया। मांडा में भी इस तरह का मामला सामने आया। पिछले दिनों बच्चे चोरी होने की इक्का-दुक्का घटनाओं के बाद इस तरह की अफवाहों की प्रदेश भर में बाढ़ सी आ गई है। बड़ी बात यह है कि संगमनगरी भी इससे अछूती नहीं है। खास बात यह है कि तमाम दावों के बावजूद पुलिस ऐसी घटनाओं पर लगाम लगा पाने में नाकाम है।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
इस मामले में मनोवैैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चा चोरी की अफवाहें फैलने से संबंधित घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हुईं। वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग ज्यादातर मामलों में अपनी तार्किक क्षमता का उपयोग नहीं करते। यही वजह है कि किसी के उकसाने मात्र पर ही वह भीड़ का हिस्सा बनकर हिंसा की घटनाओं में शामिल हो जाते हैं। मनोवैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि बच्चा चोरी की अफवाहें फैलाकर हिंसा करना कुछ शरारती लोगों के दिमाग की उपज है। कुछ कुंठित लोग हिंसा में आगे रहकर खुद को सबके सामने साहसी प्रदर्शित करना चाहते हैं। जरूरत इस बात की है कि पुलिस व प्रशासन ज्यादा गंभीर होकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करे।
फूलपुर, हंडिया में भी घटनाएं
उधर बुधवार को फूलपुर व हंडिया में भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। मंगलवार शाम बौड़ई गांव निवासी मजदूर की चांदोपारा गांव में बच्चा चोर कहकर पिटाई कर दी गई। उधर हंडिया के होलापुर गंाव में बुधवार दोपहर स्कूल से घर लौट रही दो सगी बहनों को रास्ते में एक महिला व पुरुष ने अगवा करने की कोशिश की। होलापुर गंाव निवासी रामलाल गोड़ की दो बेटियां संजना (11) व अंशी (7) गंाव के पास स्थित एक विद्यालय में कक्षा 8 व 3 में पढ़ती हैं। दोपहर में लौटते वक्त महिला व बाइकसवार युवक ने दोनों को अगवा करने की कोशिश की। बालिकाओं के शोर मचाने पर गांव के लोग दौड़े तो युवक भाग निकला लेकिन महिला पकड़ ली गई जिसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, महिला ने अपना नाम सलमा निवासी मछलीशहर जौनुपर बताया है। जांच की जा रही है।
विज्ञापन
प्रभावी कार्रवाई हो तो लगे लगाम
अफसर भले ही दावा कर रहे हों लेकिन जानकारों का कहना है कि पुलिस प्रभावी कार्रवाई करे तो ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सकती है। दरअसल डीजीपी की ओर से जारी गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि इस तरह की अफवाहें फैलाने वालों व हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो उन पर रासुका भी लगाया जाएगा। हालांकि जिले मेें लगातार घटनाएं सामने आने के बावजूद अब तक पुलिस ने किसी मामले में अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई नहीं की है। दो सितंबर को मांडा में भी बच्चा चोरी के शक में कुर्की, बरहा कलाँ सुरवादला पुरस हित आठ गांव के लोगों ने सड़क अवरुद्ध कर बोलेरोसवार लोगों पर पथराव किया। दोनों युवक मेजा के भड़ेवरा गांव में वाहन छोड़ कर भागे तब उनकी जान बच सकी। बाद में पुलिस ने बताया कि दोनों युवक रिश्तेदार से मिलने आए थे। रास्ते में मिलने पर वह रिश्तेदार की बेटी से बात करने लगे जिसपर ग्रामीणों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया।
इनका कहना है
रेंज के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करें। बताएं कि किसी भी स्थिति में कानून हाथ में न लें। साथ ही ऐसी किसी भी जानकारी पर पुलिस को सूचित करें। अफवाह फैलाने व हिंसा करने वालों की निगरानी के लिए टीम बनाई गई है। फतेहपुर में ऐसे मामले में कार्रवाई करते हुए 15 लोगोें को गिरफ्तार भी किया गया। कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ एनएसए तक की कार्रवाई की जाएगी।
केपी सिंह, डीआईजी
दो सही घटनाएं भी सामने आईं
अफवाहों के बीच बच्चा चोरी की दो सही घटनाएं भी सामने आईं। एक दिन पहले शहर में सूबेदारगंज स्टेशन पर कानपुर निवासी गुंजा ढाई साल की बच्ची को चुराकर ले जाते पकड़ी गई। जीआरपी ने उसे गिरफ्तार कर बच्ची पायल को मुक्त करा लिया। उधर 31 अगस्त को मेजा के अमिलिया कला प्राथमिक विद्यालय से लौटते वक्त बच्चे को चुराकर ले जाते वक्त मांडा रोड निवासी तौसीद को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। जिसे बाद में जेल भेज दिया गया था।
विज्ञापन
मनोवैज्ञानिक बोले, ज्यादा गंभीरता से जागरूकता फैलाने की है जरूरत
प्रयागराज। घूरपुर में मंगलवर को 20 वर्षीया अर्धविक्षिप्त महिला को लोगों ने बच्चा चोर कहकर बेरहमी से पीटा। सूचना पर पहुंची पुलिस किसी तरह महिला को छुड़ा कर थाने ले आई और तब जाकर उसकी जान बची। आलम यह रहा कि भीड़ थाने में भी जुट गई। जिसे बाद में समझाकर शांत कराया गया। ठीक ऐसी ही घटनाएं सरायइनायत के कोटवा गांव में एक दिन पहले हुई जहां बच्चा चोर समझकर ग्रामीणों ने मानासिक दिव्यांग को पीट दिया। मांडा में भी इस तरह का मामला सामने आया। पिछले दिनों बच्चे चोरी होने की इक्का-दुक्का घटनाओं के बाद इस तरह की अफवाहों की प्रदेश भर में बाढ़ सी आ गई है। बड़ी बात यह है कि संगमनगरी भी इससे अछूती नहीं है। खास बात यह है कि तमाम दावों के बावजूद पुलिस ऐसी घटनाओं पर लगाम लगा पाने में नाकाम है।
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
इस मामले में मनोवैैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चा चोरी की अफवाहें फैलने से संबंधित घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हुईं। वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग ज्यादातर मामलों में अपनी तार्किक क्षमता का उपयोग नहीं करते। यही वजह है कि किसी के उकसाने मात्र पर ही वह भीड़ का हिस्सा बनकर हिंसा की घटनाओं में शामिल हो जाते हैं। मनोवैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि बच्चा चोरी की अफवाहें फैलाकर हिंसा करना कुछ शरारती लोगों के दिमाग की उपज है। कुछ कुंठित लोग हिंसा में आगे रहकर खुद को सबके सामने साहसी प्रदर्शित करना चाहते हैं। जरूरत इस बात की है कि पुलिस व प्रशासन ज्यादा गंभीर होकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करे।
विज्ञापन
फूलपुर, हंडिया में भी घटनाएं
उधर बुधवार को फूलपुर व हंडिया में भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। मंगलवार शाम बौड़ई गांव निवासी मजदूर की चांदोपारा गांव में बच्चा चोर कहकर पिटाई कर दी गई। उधर हंडिया के होलापुर गंाव में बुधवार दोपहर स्कूल से घर लौट रही दो सगी बहनों को रास्ते में एक महिला व पुरुष ने अगवा करने की कोशिश की। होलापुर गंाव निवासी रामलाल गोड़ की दो बेटियां संजना (11) व अंशी (7) गंाव के पास स्थित एक विद्यालय में कक्षा 8 व 3 में पढ़ती हैं। दोपहर में लौटते वक्त महिला व बाइकसवार युवक ने दोनों को अगवा करने की कोशिश की। बालिकाओं के शोर मचाने पर गांव के लोग दौड़े तो युवक भाग निकला लेकिन महिला पकड़ ली गई जिसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, महिला ने अपना नाम सलमा निवासी मछलीशहर जौनुपर बताया है। जांच की जा रही है।
विज्ञापन
प्रभावी कार्रवाई हो तो लगे लगाम
अफसर भले ही दावा कर रहे हों लेकिन जानकारों का कहना है कि पुलिस प्रभावी कार्रवाई करे तो ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सकती है। दरअसल डीजीपी की ओर से जारी गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि इस तरह की अफवाहें फैलाने वालों व हिंसा में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ी तो उन पर रासुका भी लगाया जाएगा। हालांकि जिले मेें लगातार घटनाएं सामने आने के बावजूद अब तक पुलिस ने किसी मामले में अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई नहीं की है। दो सितंबर को मांडा में भी बच्चा चोरी के शक में कुर्की, बरहा कलाँ सुरवादला पुरस हित आठ गांव के लोगों ने सड़क अवरुद्ध कर बोलेरोसवार लोगों पर पथराव किया। दोनों युवक मेजा के भड़ेवरा गांव में वाहन छोड़ कर भागे तब उनकी जान बच सकी। बाद में पुलिस ने बताया कि दोनों युवक रिश्तेदार से मिलने आए थे। रास्ते में मिलने पर वह रिश्तेदार की बेटी से बात करने लगे जिसपर ग्रामीणों ने उन्हें बच्चा चोर समझ लिया।
इनका कहना है
रेंज के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करें। बताएं कि किसी भी स्थिति में कानून हाथ में न लें। साथ ही ऐसी किसी भी जानकारी पर पुलिस को सूचित करें। अफवाह फैलाने व हिंसा करने वालों की निगरानी के लिए टीम बनाई गई है। फतेहपुर में ऐसे मामले में कार्रवाई करते हुए 15 लोगोें को गिरफ्तार भी किया गया। कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ एनएसए तक की कार्रवाई की जाएगी।
केपी सिंह, डीआईजी
दो सही घटनाएं भी सामने आईं
अफवाहों के बीच बच्चा चोरी की दो सही घटनाएं भी सामने आईं। एक दिन पहले शहर में सूबेदारगंज स्टेशन पर कानपुर निवासी गुंजा ढाई साल की बच्ची को चुराकर ले जाते पकड़ी गई। जीआरपी ने उसे गिरफ्तार कर बच्ची पायल को मुक्त करा लिया। उधर 31 अगस्त को मेजा के अमिलिया कला प्राथमिक विद्यालय से लौटते वक्त बच्चे को चुराकर ले जाते वक्त मांडा रोड निवासी तौसीद को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। जिसे बाद में जेल भेज दिया गया था।