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अयोध्या कांडः फैसले से पहले बढ़ गई थी आतंकियों की बेचैनी, आखिरी रात को खाना भी नहीं खाया 

Wed, 19 Jun 2019 07:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 19 Jun 2019 07:35 AM IST
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ayodhya verdict Before the decision restless terrorists did not eat last night
court Order

अयोध्या में रामजन्म भूमि पर हमले में दोषी पाए गए आतंकी हाल के कुछ दिनों से काफी बेचैन रहने लगे थे। इस मामले के पांचों आरोपियों की दिनचर्या ही बदल गई थी। उनका अधिकतर समय इबादत में ही बीतता था। सभी पिछली तीन रातों से सोए नहीं थे। फैसले के एक दिन पहले उन्होंने खाना भी नहीं खाया। 

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सूत्रों के अनुसार जेल की हाईसिक्योरिटी सेल में रखे गए डा. इरफान के अलावा मो. नसीम, आसिफ इकबाल उर्फ फार्रुख, मो. शकील और मो. अजीज ने खाना-पीना कुछ दिनों से कम कर दिया था। नौ जून को सुनवाई पूरी होने और 18 जून को फैसला सुनाने की तारीख निश्चित होने के बाद से ही इनकी बेचैनी बढ़ गई थी।
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इनकी आपसी बातचीत भी सीमित हो गई थी। गत 15 जून से तो इन पांचों ने एक दम से खाना कम कर दिया था। ज्यादातर वक्त इबादत में बिताते। बीती तीन रातों से सो नहीं पा रहे थे। करवट बदलते रहते थे, अचानक उठकर बैठ जाते थे। फिर लेट जाते थे। फैसले के दिन मंगलवार को उन्हें दोपहर के खाने में दाल चावल रोटी सब्जी दी गई थी लेकिन, उन्होंने न के बराबर खाया।
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दोपहर करीब तीन बजे जब कोर्ट में फैसला सुनाया जा रहा था, तब भी सभी के चेहरे पर घबराहट और बेचैनी साफ दिख रही थी। साक्ष्य के अभाव में मो. अजीज के बरी होने पर सभी के अंदर एक पल के लिए उम्मीद जग गई थी लेकिन जैसे ही अगले पल बाकी चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, चारों निराश हो गए। 

केंद्रीय कारागार में अब बचे सिर्फ चार आतंकी
केंद्रीय कारागार नैनी में अभी तक कुल पांच आतंकवादी बंद थे। 18 जून को आए फैसले में एक के बरी होने के बाद मात्र चार आतंकी ही बचे हैं। आज से 14 साल पहले अयोध्या में राम जन्मभूमि पर हुए आतंकी हमले में शामिल पांच आतंकियों में से चार जम्मू-कश्मीर के हैं। आसिफ इकबाल पुत्र मो. वसील निवासी सखी मैदान, मेंडर, जनपद पुंछ, जम्मू का रहने वाला है। मो. नसीम पुत्र फिरोजुद्दीन निवासी डेरा, मेण्डा, थाना मेंडर, पुंछ, जम्मू, मो. अजीज पुत्र मो.वसील निवासी बारीदार,  थाना मेंडर, जनपद पुंछ, जम्मू व मो. नसीम पुत्र फिरोजुद्दीन निवासी डेरा मेंडा, मेंडर, पुंछ, जम्मू है। पांचवां आतंकी डा. इरफान पुत्र असलम उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के तीतरों थानांतर्गत शेख जादगानान गांव का रहने वाला है। नैनी जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एचबी सिंह ने बताया कि इन चारों के अलावा केंद्रीय कारागार नैनी में कोई आतंकवादी नहीं है। 


हाईसिक्योरिटी सेल में रखे गए हैं पांचों आरोपी
केंद्रीय कारागार नैनी के हाई सिक्योरिटी सेल में पांचों आतंकियों को रखा गया है। उन्हें हाईसिक्योरिटी सेल के अलग-अलग बैरकों में रखा जाता था, बाहरी कैदियों से उनकी मुलाकात न के बराबर होती थी। दिन में दो बार इन पांचों कैदियों को और वहां रहने वाले अन्य कैदियों को कुछ देर के लिए बाहर आंगननुमा स्थल पर निकाला जाता था, जहां वह आपस में ही बातचीत करते थे। कभी इन्हें दो की संख्या में तो कभी अकेले-अकेले रखा जाता था। यह सिक्योरिटी रीजन से किया जाता था। सूत्रों के अनुसार हाईसिक्योरिटी सेल में कुल 13 बैरक बने हैं, जिनमें से पांच में इनकों और बाकी में अन्य कैदियों को रखा जाता है।  

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