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अटल के पीएम रहते इलाहाबाद ने बदली थी करवट

Fri, 17 Aug 2018 02:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 17 Aug 2018 02:56 AM IST
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Atal had shifted to Allahabad
कश्मीरियत - फोटो : SELF
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तो कुल तीन बार देश की कमान संभालने का मौका मिला। पहली बार 13 दिन, दूसरी बार 11 माह एवं तीसरी बार उन्होंने अपने प्रधानमंत्री का पूरा कार्यकाल पूरा किया। इस अवधि में उन्होंने इलाहाबाद को काफी कुछ दिया। इसमें नैनी का यमुना ब्रिज इलाहाबाद के लिए सबसे बड़ा तोहफा माना जाता है। इस पुल के निर्माण ने इलाहाबाद को नई रफ्तार दी। इसके निर्माण के बाद बुंदेलखंड, मध्यप्रदेश और विंध्य क्षेत्र से इलाहाबाद की कनेक्टिविटी बेहतर हो गई।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के कार्यकाल के दौरान इलाहाबाद के सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी का केंद्र में बड़ा कद रहा। अटल जी ने उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी थी। उनके प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही इलाहाबाद को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी) का भी तोहफा मिला। इतना ही नहीं, देश के प्रमुख इंजीनियरिंग कालेजों में शामिल मोती लाल नेहरू रीजनल इंजीनियरिंग कालेज को भी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) का दर्जा भी उनके प्रधानमंत्री रहने के दौरान मिला। हालांकि डा. मुरली मनोहर जोशी ने भी इसके लिए काफी जोर आजमाइश की थी, लेकिन अंतिम निर्णय अटल जी को ही करना था और उन्होंने इसकी स्वीकृति भी दे दी।
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स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के रूप में इलाहाबाद को फोरलेन हाइवे की सौगात भी अटल बिहारी वाजपेयी ने दी थी। वाराणसी से हंडिया होकर कोखराज के रास्ते कानपुर जाने वाले इस मार्ग का फोरलेन अटल सरकार के दौरान ही हुआ। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सूबे के पूर्व शिक्षा मंत्री डा. नरेंद्र कुमार सिंह गौर का कहना है कि पीएम रहते अटल जी ने इलाहाबाद को जो कुछ दिया, वह उसके पहले कोई भी प्रधानमंत्री नहीं दे सका। उन्होंने बताया कि उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान इलाहाबाद में साइंस सिटी बनाने का भी प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था लेकिन बाद में एनडीए सरकार जाने के बाद यह प्रोजेक्ट निरस्त हो गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा दिए जाने का बिल भी अटल सरकार के कार्यकाल के  दौरान राज्यसभा में रखा गया था, लेकिन वह बिल राज्यसभा से स्वीकृत नहीं हुआ था। बाद में यूपीए सरकार के दौरान विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिला।
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