अटल बिहारी बाजपयी जयंती : कवि और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से अटल को किया याद, दी गई श्रद्धांजलि
मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर ने कहा अटल जी भारत के सच्चे सपूत थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठित करते हुए पार्टी को अपने त्याग और तपस्या से सींचने का काम किया है। डॉ. गौर ने कहा कि अटल जी शुचिता के प्रतीक थे।
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भाजपा कार्यालय सिविल लाइंस में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के तत्वाधान में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जयंती पर अटल काव्योत्सव का आयोजन किया गया।जिसमें अटल जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा तत्पश्चात कवि सम्मेलन हुआ। अध्यक्षता भाजपा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र मिश्र ने किया। उन्होंने अटल जी को सच्चा राष्ट्रभक्त बताते हुए कहा की अटल जी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया।
मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह गौर ने कहा अटल जी भारत के सच्चे सपूत थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठित करते हुए पार्टी को अपने त्याग और तपस्या से सींचने का काम किया है। डॉ. गौर ने कहा कि अटल जी शुचिता के प्रतीक थे। विशिष्ट अतिथि महापौर उमेश चंद्र केसरवानी जी ने कहा अटल जी युग प्रणेता हैं, जिनके प्रेरणा से आज भारत फिर से विश्व गुरु बनने के लिए बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम प्रभारी कुश श्रीवास्तव जी ने कहा कि आज वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जहा युद्ध की स्थित बनी हुई है, वहां आज भारत एक शांति के प्रतीक के रूप समूचा विश्व बड़े आशा के साथ देख रहा है। अटल के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। कार्यक्रम संयोजक एवं भारतीय जनता पार्टी सांस्कृतिक प्रकोष्ठ क्षेत्रीय सह संयोजक आभा मधुर जी ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई के व्यक्तित्व से आज के युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. एलएस ओझा जी ने कहा अटल के व्यक्तित्व से और उनके जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय ने कहा कि अटल जी अजात शत्रु थे। तत्पश्चात कवि सम्मेलन का शुभारंभ आकांक्षा बुंदेला की वाणी वंदना के साथ हुआ।
गीतकार शैलेंद्र मधुर जी ने जब अपने गीत प्रस्तुत किया तो श्रोतागण झूम उठे। जिसने पिया कई बार गरल, भाषा जिसकी थी बड़ी सरल, है सत्य अटल जी रहे अटल। अभिजीत मिश्रा अकेला,राय बरेली ने अपने काव्य पाठ कर कवि सम्मेलन की शुरुआत की। अटल वही जो कविताओं का उपमेय और अपमान बने। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे योगेश ओझा झमाझम ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सीमा से तिरंगे में लिपट करके जो आए, बोले उनके खून की वो धार वंदे मातरम। गीतकार आनंद श्रीवास्तव ने अपने गीतों से लोगों को आह्लादित किया। मुझको बचपन की कोई फिर से कहा निशानी दे दे। मां के आंचल तलें नींद सुहानी दे दे।
हास्य कवि नजर इलाहाबादी ने अटलजी को समर्पित कविता सुनाई। नमन करी हे अमर अटल जी, पूरा भारत ऋणी तोहार। कवि अमित जौनपुरी ने अटल जी के कविताओं का काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन में राजू पाठक, टीपी सिंह, मनोज कुशवाहा, गिरजेश मिश्र, विजय श्रीवास्तव, आशुतोष दिवेदी, राष्ट्र गौरव, आशुतोष हर्षवर्धन, मनीष केसरवानी, संजय गुप्ता, राजन शुक्ला, रोहित जायसवाल अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।