Research : घरेलू दूषित जल को साफ करने में अश्वगंधा बनी कारगर, हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से मिला नया समाधान
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सुशील कुमार और साक्षी अग्रहरि ने एक ऐसा शोध किया है जो भविष्य में पानी की कमी और गंदे पानी के निस्तारण की समस्या का समाधान बन सकता है।
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सुशील कुमार और साक्षी अग्रहरि ने एक ऐसा शोध किया है जो भविष्य में पानी की कमी और गंदे पानी के निस्तारण की समस्या का समाधान बन सकता है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल केमोस्फीयर में प्रकाशित हुआ है।
शोध में वैज्ञानिकों ने अश्वगंधा पौधे का उपयोग करके घरेलू दूषित पानी (ग्रे वाटर) यानी रसोई, स्नान घर और कपड़े धोने से निकलने वाले पानी को साफ करने का सफल प्रयोग किया। खास बात यह रही कि प्रक्रिया में पौधों के औषधीय गुण भी सुरक्षित रहे और कई मामलों में बढ़े हुए भी पाए गए।
बिना मिट्टी के खेती से हुआ कमाल
शोधकर्ताओं ने हाइड्रोपोनिक्स की न्यूट्रिएंट फिल्म तकनीक (एनएफटी) का इस्तेमाल किया। इसमें पौधों को मिट्टी के बजाय पानी और पोषक तत्वों वाले माध्यम में उगाया गया। पीवीसी पाइप, एलईडी लाइट और पानी की टंकी से तैयार इस प्रणाली में अश्वगंधा के पौधे लगाए गए।
120 दिन तक चले इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने पाया कि गंदे पानी से कई हानिकारक तत्व काफी हद तक हट गए। शोध के अनुसार केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) में 97.74 फीसदी, फॉस्फोरस में 93.62 फीसदी और नाइट्रेट-नाइट्रोजन में 89.68 फीसदी की कमी आई।
क्या है हाइड्रोपोनिक्स
हाइड्रोपोनिक्स मिट्टी के बिना केवल पानी और पोषक तत्वों के घोल का उपयोग करके पौधे उगाने की एक आधुनिक तकनीक है। इस विधि में पौधों को आवश्यक खनिज सीधे पानी के माध्यम से मिलते हैं, इससे वे सामान्य मिट्टी की खेती की तुलना में 50 फीसदी तेजी से बढ़ सकते हैं।
पौधों की वृद्धि भी हुई बेहतर
प्रयोग के दौरान अश्वगंधा के पौधों में गीला बायोमास 72 फीसदी तक बढ़ा, जड़ों की लंबाई और पत्तियों की संख्या में इजाफा हुआ। वैज्ञानिकों ने क्लोरोफिल, फेनोलिक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि की भी जांच की। पाया कि पौधों की औषधीय क्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
भविष्य में मिल सकता है लाभ
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में जल संरक्षण, अपशिष्ट जल प्रबंधन और औषधीय खेती को एक साथ जोड़ सकती है। इससे घरेलू गंदे पानी का दोबारा उपयोग संभव होगा और किसानों को आर्थिक लाभ भी मिल सकेगा।