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सात दिन में अनुमोदन न करने पर स्वतः अनुमोदित हो जाएगी नियुक्ति

Fri, 09 Aug 2019 10:09 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 09 Aug 2019 10:09 PM IST
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Appointment will be automatically approved if not approved within seven days
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अध्यापक की नियुक्ति का अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक यदि सात दिन में नहीं करता तो नियुक्ति स्वत: अनुमोदित मानी जाएगी। ऐसी नियुक्ति को प्रक्रिया का पालन न होने के आधार पर अवैध मान कर नियमित करने से इंकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने अध्यापक को नियमित करने से इंकार करने का डीआईओएस चंदौली का आदेश रद्द कर दिया है और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड एक्ट 1982 की धारा 33 (जी) के तहत सेवा नियमितीकरण पर चार माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने कहा है कि सक्षम प्राधिकारी प्रबंधक और डीआईओएस से रिकार्ड मंगाकर निर्णय लें। नियमितीकरण पर निर्णय होने तक याचियों को प्राप्त अंतरिम आदेश जारी रहेगा। प्रमोद पांडेय और पांच अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने दिया है। अपील पर वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने बहस की।
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सकलडीहा इंटर कालेज, चंदौली में एलटी ग्रेड अध्यापक पद खाली हुआ। प्राधिकृत नियंत्रक ने डीआईओएस से तदर्थ नियुक्ति की अनुमति मांगी। कोई उत्तर न मिलने पर विज्ञापन निकाला गया। नियंत्रक ने चयन के बाद याचीगण की नियुक्ति कर निरीक्षक को 17 अक्टूबर 1997 को अनुमोदन के लिए भेजा। वेतन न देने पर दाखिल याचिका पर कोर्ट ने निर्णय लेने का आदेश दिया। जिस पर निरीक्षक ने नियुक्ति प्रक्रिया का पालन न होने के कारण नियुक्ति अवैध करार दे दी।
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निरीक्षक ने कहा कि विद्यालय प्रबंधक द्वारा की गई तदर्थ नियुक्ति विधि के विपरीत है। इसलिए याचीगण वेतन पाने के हकदार नहीं हैं। इसके खिलाफ एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी। जिसे विशेष अपील में चुनौती दी गई। खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि नियुक्ति के दस्तावेज निरीक्षक को भेजे गए थे। जिस पर कोई निर्णय न होने की स्थिति में डीम्ड अनुमोदन हो गया। ऐसे में एकल पीठ द्वारा नियुक्ति अवैध कहना सही नहीं है। याचीगण को नियमित किए जाने पर निर्णय होना चाहिए।
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