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एससी, एसटी अपराध में जमानत अर्जी सात दिन के भीतर कोर्ट में पेश करें
Wed, 13 Jan 2021 10:19 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 13 Jan 2021 10:19 PM IST
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अदालत
- फोटो : file
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामान्य समादेश जारी कर कहा है कि एससी, एसटी एक्ट के तहत अपराध में जमानत अर्जी/अपील सरकार को नोटिस के सातवें दिन कोर्ट में अवश्य पेश किया जाए। इस दौरान पुलिस पीड़ित या आश्रित को अर्जी की सूचना दे ताकि सुनवाई के दिन वह कोर्ट में अपना पक्ष रख सके। साथ ही अर्जी पर पुलिस जानकारी समय के भीतर उपलब्ध कराए ताकि आरोपी को न्याय मिलने मे देरी न होने पाए। इसी के साथ गाजीपुर, करकंदा थाना क्षेत्र के याची अजीत चौधरी को सशर्त जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।
सह अभियुक्त को पहले ही जमानत मिल चुकी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने अजीत चौधरी की अपील पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि धारा 15ए (3) व (5) में साफ तौर पर कहा गया है कि पीड़ित या आश्रित को कोर्ट कार्यवाही की सूचना दी जाए। उसे सुनवाई का हक दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित या आश्रित को नोटिस न मिल पाने या उसके हाजिर न होने के चलते अभियुक्त को अनिश्चितकाल तक सुनवाई से वंचित नहीं किया जा सकता।
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सह अभियुक्त को पहले ही जमानत मिल चुकी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने अजीत चौधरी की अपील पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि धारा 15ए (3) व (5) में साफ तौर पर कहा गया है कि पीड़ित या आश्रित को कोर्ट कार्यवाही की सूचना दी जाए। उसे सुनवाई का हक दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित या आश्रित को नोटिस न मिल पाने या उसके हाजिर न होने के चलते अभियुक्त को अनिश्चितकाल तक सुनवाई से वंचित नहीं किया जा सकता।
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