High Court : व्याख्यान में दुष्कर्म को पौराणिक काल की घटनाओं से जोड़ने वाले प्रोफेसर की अग्रिम जमानत मंजूर
डॉ.जितेंद्र कुमार के खिलाफ वर्ष 2022 में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की है। आरोप है कि उन्होंने फॉरेंसिक मेडिसिन की कक्षा में रेप को लेकर अपने एक व्याख्यान में पौराणिक काल में भी दुष्कर्म की घटनाओं के ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किए।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्याख्यान के दौरान दुष्कर्म को लेकर पौराणिक काल की घटनाओं का उदाहरण देने पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। प्रोफ़ेसर के खिलाफ धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की अदालत ने प्रोफेसर डॉ.जितेंद्र कुमार को बड़ी राहत दी है।
डॉ.जितेंद्र कुमार के खिलाफ वर्ष 2022 में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की है। आरोप है कि उन्होंने फॉरेंसिक मेडिसिन की कक्षा में रेप को लेकर अपने एक व्याख्यान में पौराणिक काल में भी दुष्कर्म की घटनाओं के ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किए। जिससे एक वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
कोर्ट ने अंतरिम अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए कहा की विश्वविद्यालय की ओर से इस मामले की पड़ताल की गई है। तीन प्रोफेसर व एक रजिस्ट्रार की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि याची ने वास्तविक गलती की है। मगर रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि उसने ऐसा जानबूझकर बिना किसी आधार के धार्मिक इरादे से किया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि याची ने जानबूझकर लोक शांति और सद्भावना को धार्मिक भावनाओं के आधार पर बिगाड़ने का प्रयास किया है।
कोर्ट ने दी हिदायत
कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए शर्त लगाई है कि याची छात्रों को पढ़ाने के दौरान कोई भी ऐसा ऐतिहासिक संदर्भ नहीं देगा,जो विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल द्वारा अनुमोदित ना हो।
निलंबित भी हो चुके है प्रोफेसर
मामले के अनुसार प्रो. जितेंद्र कुमार को अप्रैल 2022 में यह आरोप लगाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया था। मगर बाद में 2023 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनको पुनः बहाल कर दिया। प्रो. जितेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने हिंदू धर्म में प्राचीन काल में दुष्कर्म की घटनाओं का उदाहरण देते हुए यह समझाने की कोशिश की कि अति प्राचीन काल में भी दुष्कर्म की घटनाएं होती थीं। ऐसा करके उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया है।