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Prayagraj News: धोखाधड़ी के मामलों की जांच को एंटी फ्रॉड सेल गठित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Apr 2025 01:33 AM IST
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Anti-fraud cell formed to investigate fraud cases
धोखाधड़ी के मामलाें में अब तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। जनपद के तीनों पुलिस जाेन में इन मामलों के लिए एंटी फ्रॉड सेल का गठन किया गया है। इनमें जाेन के एडीसीपी व सभी एसीपी को शामिल किया गया है। जहां एडीसीपी नहीं हैं, वहां सेल का नेतृत्व डीसीपी करेंगे।
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धोखाधड़ी के मामलों में एफआईआर पंजीकृत कराने से लेकर मुकदमे की विवेचना पूरी कराने की प्रक्रिया अभी बहुत लंबी होती है। पहले तो थानेदार एफआईआर ही नहीं पंजीकृत करते। रिपोर्ट दर्ज हो भी गई तो दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र करने के नाम पर ही विवेचना सालों लंबित रहती है।
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इसी को देखते हुए अब जनपद के तीनों जोन में एंटी फ्रॉड सेल का गठन किया गया है। यह सेल सिर्फ धोखाधड़ी के मामलों की शिकायत की जांच व पूर्व में दर्ज हुए इससे संबंधित मुकदमों की विवेचना, कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा करेगा।
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डीसीपी गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि पूर्व में इस संबंध में डीजीपी मुख्यालय की ओर से आदेश भी आ चुका है। इसी को देखते हुए एंटी फ्रॉड सेल का गठन किया गया है। गंगानगर में एडीसीपी इस सेल का नेतृत्व करेंगे।
सेल का काम धोखाधड़ी से संबंधित शिकायती पत्रों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कराना होगा। इसके साथ ही पूर्व में दर्ज मुकदमों की समीक्षा का काम भी इसी सेल के जिम्मे होगा।
सेल के अफसर लंबे समय से लंबित मामलों के विवेचकों को बुलाकर उनसे इसका कारण पूछेंगे। साथ ही पर्यवेक्षण करते हुए विवेचना को निस्तारित कराने का प्रयास करेंगे।


लगभग 2200 मामले लंबित
सूत्रों का कहना है कि धोखाधड़ी से संबंधित लगभग 2200 मामलों की विवेचना वर्तमान में लंबित है। इनमें से कुछ ऐसे हैं जो दो साल या इससे ज्यादा वक्त से लंबित हैं। ज्यादातर मामलों के लंबित रहने की वजह विवेचकों की लापरवाही है। दरअसल, तत्कालीन विवेचक ने समय रहते विवेचना के संबंध में आवश्यक कार्रवाई नहीं की। वह फाइल दबाए रहे और उनके तबादले के बाद विवेचना नए दरोगा को ट्रांसफर हो गई। कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें समय से विवेचना के संबंध में कार्रवाई न करने से आरोपी भाग निकले या ठिकाना बदल दिया।
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