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चांदपुर खमरिया में वन्य जीवों के संरक्षण पर जवाब तलब
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Answers on the conservation of wildlife in Chandpur Khamaria
प्रयागराज। प्रयागराज की कोरांव तहसील के चांदपुर खमरिया जंगल में काले हिरणों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में वन्यजीव संरक्षण के अलावा पर्यावरण संतुलन के लिए शहर और आसपास के कस्बों में पौधरोपण तथा वाटर हार्वेस्टिंग योजना को अमल में लाने की मांग की गई है। जनहित याचिका की सुनवाई 16 अगस्त को होगी। याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने सुनवाई की।
अधिवक्ता सुनीता शर्मा और तृप्ती वर्मा तथा सुशील पांडेय ने जनहित याचिकाएं दाखिल कर चांदपुर खमरिया से काले हिरणों और अन्य वन्यजीवों के पलायन का मामला उठाया है। कहा गया कि पर्याप्त जंगल और पीने का पानी नहीं होने के कारण वन्यजीव अन्य क्षेत्रों में पलायन कर रहे हैं। उनके संरक्षण का प्रयास होना चाहिए। कुंभ-2019 के दौरान अंधाधुंध पेड़ों की कटाई के कारण बिगड़े़ पर्यावरण संतुलन का भी मामला याचिका में उठाया गया है।
जिला प्रशासन सहित अन्य विभागों को पर्याप्त संख्या में पौधे लगाने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। याची के अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने कोर्ट को सुझाव दिया कि पीपल, बरगद, आम, नीम जामुन, महुआ, पाकड़ आदि छायादार और फलदार वृक्ष लगाए जाएं। याची का कहना है कि पौधरोपण सेभूगर्भ जलस्तर में गिरावट रुकेगी और पर्यावरण स्वस्थ होगा। जीवन के अधिकार की मूलभूत जरूरतें पूरी होंगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य विभागों को याचिका पर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। सुनवाई 16 अगस्त को होगी।
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अधिवक्ता सुनीता शर्मा और तृप्ती वर्मा तथा सुशील पांडेय ने जनहित याचिकाएं दाखिल कर चांदपुर खमरिया से काले हिरणों और अन्य वन्यजीवों के पलायन का मामला उठाया है। कहा गया कि पर्याप्त जंगल और पीने का पानी नहीं होने के कारण वन्यजीव अन्य क्षेत्रों में पलायन कर रहे हैं। उनके संरक्षण का प्रयास होना चाहिए। कुंभ-2019 के दौरान अंधाधुंध पेड़ों की कटाई के कारण बिगड़े़ पर्यावरण संतुलन का भी मामला याचिका में उठाया गया है।
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जिला प्रशासन सहित अन्य विभागों को पर्याप्त संख्या में पौधे लगाने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। याची के अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने कोर्ट को सुझाव दिया कि पीपल, बरगद, आम, नीम जामुन, महुआ, पाकड़ आदि छायादार और फलदार वृक्ष लगाए जाएं। याची का कहना है कि पौधरोपण सेभूगर्भ जलस्तर में गिरावट रुकेगी और पर्यावरण स्वस्थ होगा। जीवन के अधिकार की मूलभूत जरूरतें पूरी होंगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य विभागों को याचिका पर जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। सुनवाई 16 अगस्त को होगी।
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