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Prayagraj News: वेतन भुगतान न करने पर जवाब तलब, चंदौली के अमरदीन इंटर कॉलेज का मामला
Fri, 04 Sep 2020 07:17 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 04 Sep 2020 07:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमरदीन इंटर कालेज चंदौली में अंशकालिक एल टी ग्रेड अध्यापक नियुक्ति का अनुमोदन करने से इंकार करने के जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश की वैधता की चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से छह सप्ताह में जवाब मांगा है और अठ दिसंबर को सुनवाई के लिए पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने कपिल देव सिंह यादव की याचिका पर दिया है ।
याची की नियुक्ति अंशकालिक पद पर विज्ञापन के जरिए प्रबंध समिति द्वारा छह जुलाई 98 को की गई।और अनुमोदन के लिए डी आई ओ एस को भेजा गया। याची अधिवक्ता का कहना है कि कानून के तहत सात दिन मे अनुमोदन पर निर्णय न लेने पर डीम्ड अनुमोदन मान लिया जाएगा। ऐसे में वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। फिर भी वेतन भुगतान नहीं किया गया तो याचिका दाखिल की गयी।
कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक को याची के वेतन भुगतान पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।किन्तु निरीक्षक ने नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठाते हुए प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया। तो दुबारा याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने निरीक्षक का आदेश रद्द करते हुए नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया और कहा कि नियुक्ति के 19 साल इसकी बाद इसकी वैधता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। इसके बावजूद निरीक्षक ने वेतन भुगतान करने से इंकार कर दिया है। जिसे तीसरी बार चुनौती दी गई है।
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याची की नियुक्ति अंशकालिक पद पर विज्ञापन के जरिए प्रबंध समिति द्वारा छह जुलाई 98 को की गई।और अनुमोदन के लिए डी आई ओ एस को भेजा गया। याची अधिवक्ता का कहना है कि कानून के तहत सात दिन मे अनुमोदन पर निर्णय न लेने पर डीम्ड अनुमोदन मान लिया जाएगा। ऐसे में वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। फिर भी वेतन भुगतान नहीं किया गया तो याचिका दाखिल की गयी।
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कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक को याची के वेतन भुगतान पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।किन्तु निरीक्षक ने नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठाते हुए प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया। तो दुबारा याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने निरीक्षक का आदेश रद्द करते हुए नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया और कहा कि नियुक्ति के 19 साल इसकी बाद इसकी वैधता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। इसके बावजूद निरीक्षक ने वेतन भुगतान करने से इंकार कर दिया है। जिसे तीसरी बार चुनौती दी गई है।
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