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Prayagraj : पिता की डांट से नाराज किशोरी ने खाई बीपी की 52 गोलियां, चार दिन रखा वेंटीलेटर पर

Sun, 18 Jan 2026 07:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 18 Jan 2026 07:04 PM IST
सार

पिता की डांट से नाराज एक 18 वर्षीय किशोरी ने 52 एम्लोडिपिन (बीपी की दवा) की गोलियां खा ली। जिसके बाद लड़की का बीपी काफी तेजी से गिर गया। हालांकि एक हफ्ते के बाद लड़की की जान बचाने में चिकित्सकों को कामयाबी मिली।

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Angry at her father's scolding, a teenager consumed 52 blood pressure pills and was put on a ventilator
दवाइयां - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पिता की डांट से नाराज एक 18 वर्षीय किशोरी ने 52 एम्लोडिपिन (बीपी की दवा) की गोलियां खा ली। जिसके बाद लड़की का बीपी काफी तेजी से गिर गया। हालांकि एक हफ्ते के बाद लड़की की जान बचाने में चिकित्सकों को कामयाबी मिली। फिलहाल चिकित्सकों का कहना है कि बीपी की दवा का प्वाइजनिंग के रुप में इस्तेमाल करने का यह काफी दुर्लभ मामला है। जिसे अब इंटरनेशनल जनरल में पब्लिश करने की तैयारी है।

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अल्लापुर निवासी 18 वर्षीय किशोरी इंटर की छात्रा है। करीब दो महीने पहले अधिक मोबाइल चलाने की वजह से पिता ने लड़की को डांट लगा दी और मोबाइल छुपा दिया। करीब 24 घंटे मोबाइल न मिलने पर लड़की इतना तनाव में चली गई, कि उसने अपने पिता की 52 बीपी की गोलियां एक साथ खा ली। जिसके बाद परिजन आनन-फानन की स्थिति में लड़की को लेकर एसआरएन अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। जहां से लड़की को मेडिसिन विभाग में रेफर कर दिया। वहीं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरके तिवारी ने देखा कि लड़की का बीपी काउंट ही नहीं हो रहा है। जिसके बाद मरीज को तुरंत वेंटीलेटर पर रखा गया। वहीं दूसरे दिन बीपी 50 पर पहुंचा।
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लेकिन इसके आगे बीपी नहीं बढ़ा। इस दौरान चिकित्सकों को समझ में नहीं आ रहा था कैसे लड़की की जान बचाएं। चार दिनों तक मरीज को वेंटीलेटर पर रखा गया। जिसके बाद चिकित्सकों की चिंता होने लगी कि कहीं मरीज वेंटीलेटर की वजह से निमोनिया का शिकार न हो जाये। काफी खोज के बाद मरीज को लो शुगर को कंट्रोल करने के वाला ग्लूकागन इंजेक्शन लगाया गया। जिसके बाद मरीज के बीपी में सुधार देखा गया। करीब सात दिन तक चले उपचार के बाद मरीज की जान बचाई जा सकी। फिलहाल इस प्रकार के दुर्लभ उपचार को अब इंटरनेशनल जर्नल ऑफ टॉक्सिकोलॉजी में प्रकाशित करने की तैयारी है।

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पिता ने छुपाई सच्चाई

पिता ने उपचार के दौरान बताया कि बेटी ने 20 बीपी की दवा खाई है। वहीं जब मरीज की जान बच गई और 15 दिन बाद फॉलोअप में बुलाया गया, तब पिता ने कहा कि बेटी ने 20 नहीं बल्कि 52 बीपी की दवा खाई थी।

यह अपने में एक अनोखा केस है। क्योंकि अधिकांश लोग जहर या फिर कीड़े मारने वाली दवा का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बीपी के दवा की भारी डोज लेने से प्वाइजनिंग होने का यह दुर्लभ मामला है। बच्ची के उपचार को लेकर कई इंटरनेशनल जनरल को खंगालना पड़ा। क्योंकि इस प्रकार के प्वाइजनिंग का कोई एंटी डोज नहीं होता है। - डॉ. आरके तिवारी, वरिष्ठ फिजीशियन, एसआरएन अस्पताल।

आज कल 8 से 18 वर्ष के बीच के बच्चों में धैर्य कम देखने को मिलता है। वह थोड़ी-थोड़ी बात पर जान देने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ तालमेल बैठाना जरुरी है। जिसके लिए अपनी व्यस्तता से समय निकालकर उनसे बात करना और सही गलत का फर्क बताना जरुरी है। - डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक परामर्शदाता, कॉल्विन अस्पताल। 

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