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अमित शाह के बयान पर भड़के हाईकोर्ट के वकील
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 08 Jun 2016 02:02 AM IST
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अमित शाह
- फोटो : file photo
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच गठित करने के मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान से हाईकोेर्ट के वकीलों में उबाल आ गया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि हाईकोर्ट बार ऐसी किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा। बयान का विरोध करते हुए बार के महासचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा है कि भाजपा के नेता भविष्य में इस प्रकार की बयान न करें वरना अधिवक्ता उसका विरोध करेंगे तथा बेंच के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राधाकांत ओझा की अध्यक्षता में बार कार्यकारिणी की एक आपात बैठक हुई जिसमें भाजपा अध्यक्ष के बयान पर आक्रोश जताया गया। बार के पूर्व महासचिव अनिल तिवारी ने प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश मेें हाईकोर्ट की बेंच बनाने का अर्थ है न्यायपालिका को कमजोर करना। पहले भी इस प्रकार की कोशिश का वकीलों ने पुरजोर विरोध किया है, हाईकोर्ट का विभाजन किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।
अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने भी अमित शाह के बयान का विरोध किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट का अधिवक्ता ऐसे किसी प्रयास को सफल नहीं होने देगा।
कार्यकारिणी की बैठक में दया शंकर मिश्र, सुनील कुमार सिंह, आनंद मोहन पांडेय, बृजेंद्र पांडेय, रुचिर श्रीवास्तव, सुधीर कुमार चंद्रौल, रणविजय सिंह, जनार्दन यादव, हिमकन्या श्रीवास्तव, राजीव शुक्ला, विवेक मिश्र सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्य और अधिवक्ता मौजूद थे।
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हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राधाकांत ओझा की अध्यक्षता में बार कार्यकारिणी की एक आपात बैठक हुई जिसमें भाजपा अध्यक्ष के बयान पर आक्रोश जताया गया। बार के पूर्व महासचिव अनिल तिवारी ने प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश मेें हाईकोर्ट की बेंच बनाने का अर्थ है न्यायपालिका को कमजोर करना। पहले भी इस प्रकार की कोशिश का वकीलों ने पुरजोर विरोध किया है, हाईकोर्ट का विभाजन किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।
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अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने भी अमित शाह के बयान का विरोध किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट का अधिवक्ता ऐसे किसी प्रयास को सफल नहीं होने देगा।
कार्यकारिणी की बैठक में दया शंकर मिश्र, सुनील कुमार सिंह, आनंद मोहन पांडेय, बृजेंद्र पांडेय, रुचिर श्रीवास्तव, सुधीर कुमार चंद्रौल, रणविजय सिंह, जनार्दन यादव, हिमकन्या श्रीवास्तव, राजीव शुक्ला, विवेक मिश्र सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्य और अधिवक्ता मौजूद थे।
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