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शिया वक्फ बोर्ड चुनाव में धांधली का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
Fri, 16 Jul 2021 08:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 16 Jul 2021 08:24 PM IST
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शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी
- फोटो : amar ujala
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चुनाव की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार व बोर्ड से जवाब मांगा है। कहा है कि यदि 24 मार्च 21 की अधिसूचना के तहत चुनाव करा लिया जाता है तो वह याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा। याचिका पर अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने अल्लामा जमीर नकवी व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने जवाबी हलफनामे के जरिये पूछा है कि मतदाता सूची के लिए मुतवल्ली किस आधार पर चयनित किए गए हैं। इससे पहले क्या इनकी वार्षिक आय का ऑडिट कराया गया है या नहीं। क्योंकि एक लाख की सालाना आय वाले मुतवल्लियों को ही सदस्य चुनने का अधिकार है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने बहस की।
उनका कहना था कि वक्फ एक्ट के अनुसार वक्फ के वही मुतवल्ली बोर्ड के सदस्य चुनते हैं ,जिनकी वार्षिक आय एक लाख से अधिक हो। जिसके लिए वार्षिक ऑडिट किया जाना जरूरी है। बिना यह प्रक्रिया पूरी किए चुनाव कराना अवैध है। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और जवाब मांगा है।
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याची का कहना है कि पिछले दस वर्षों से वक्फ संपत्तियों का ऑडिट नहीं कराया गया है और पुरानी वोटर लिस्ट से मुतवल्ली कोटे का चुनाव कराया जा रहा है। विवादों में घिरे पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी और सैयद फ़ैज़ी मुतवल्ली कोटे से फिर सदस्य चुने गए हैं। ग्यारह चुने हुए और मनोनीत सदस्यों के द्वारा चेयरमैन का चुनाव किया जाता है। इनमें से आठ सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि तीन नामित किए जाते हैं ।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने अल्लामा जमीर नकवी व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने जवाबी हलफनामे के जरिये पूछा है कि मतदाता सूची के लिए मुतवल्ली किस आधार पर चयनित किए गए हैं। इससे पहले क्या इनकी वार्षिक आय का ऑडिट कराया गया है या नहीं। क्योंकि एक लाख की सालाना आय वाले मुतवल्लियों को ही सदस्य चुनने का अधिकार है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने बहस की।
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उनका कहना था कि वक्फ एक्ट के अनुसार वक्फ के वही मुतवल्ली बोर्ड के सदस्य चुनते हैं ,जिनकी वार्षिक आय एक लाख से अधिक हो। जिसके लिए वार्षिक ऑडिट किया जाना जरूरी है। बिना यह प्रक्रिया पूरी किए चुनाव कराना अवैध है। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और जवाब मांगा है।
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याची का कहना है कि पिछले दस वर्षों से वक्फ संपत्तियों का ऑडिट नहीं कराया गया है और पुरानी वोटर लिस्ट से मुतवल्ली कोटे का चुनाव कराया जा रहा है। विवादों में घिरे पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी और सैयद फ़ैज़ी मुतवल्ली कोटे से फिर सदस्य चुने गए हैं। ग्यारह चुने हुए और मनोनीत सदस्यों के द्वारा चेयरमैन का चुनाव किया जाता है। इनमें से आठ सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि तीन नामित किए जाते हैं ।