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सीमा में बंधकर खत्म हो जाती है भाषा

Wed, 26 Feb 2020 12:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Feb 2020 12:42 AM IST
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Allahabad University Urdu department news
Allahabad University Urdu department news - फोटो : ALDCOMPACT
इविवि में हुई संगोष्ठी में बोले हिंदुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्ष डॉ. उदय
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प्रयागराज। भाषा को किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता। अगर ऐसा किय गया तो वह भाषा खत्म हो जाती है और भाषा के साथ साहित्य भी मुर्दा हो जाता है। यह बात हिंदुस्तानी एकेडेमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने मंगलवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के उर्दू विभाग में आयोजित संगोष्ठी में कही।
पहली बार उर्दू विभाग और हिंदुस्तानी एकेडेमी के संयुक्त तत्वावधान में ‘उर्दू साहित्य में भारतीय संस्कृति’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विभागाध्यक्ष प्रो. शमबन हमीद ने कहा कि उर्दू और हिंदी भाषा का संगम ही भारत में आपसी भाईचारे का उदाहरण है। संचालन कर रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. फाजिल अहसन हाशमी ने कहा कि उर्दू केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं पंरपरा का प्रतीक है।
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मुख्य अतिथि प्रो. मुजाविर हुसैन ने कहा कि संस्कृति का अर्थ व्यवहारिक जीवन में अपनाने से सुदृढं होता है। वरिष्ठ साहित्य रविनंदन सिंह ने उर्दू-हिंदी के आपसी मेलजोल को उदाहरण सहित प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि ज्वाइंट कमिश्नर अतुल कुमार पांडेय ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। इस मौके पर प्रो. आरके उपाध्याय, असरार गांधी, प्रो. सालेहा रशीद, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. जफर, डॉ. काशिक, डॉ. नासेहा, डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. जरीना, डॉ. महमूद आदि मौजूद रहे।
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