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प्रस्ताव भेजा, खेल नीति घोषित नहीं

Tue, 13 Jan 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Tue, 13 Jan 2015 12:12 AM IST
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allahabad university
इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिले नौ वर्ष हो गए लेकिन विवि अभी तक अपनी खेल नहीं जारी नहीं कर सका है। खेल नीति को बनाकर रजिस्ट्रार के पास भेज दिया गया है लेकिन वहां वह फाइलों के बीच दब गया है। हालांकि इस दौरान यूजीसी की पहल पर विवि प्रशासन ने मौजूदा संसाधनों का ब्यौरा भेजा है लेकिन उसके लिए उसने तय समय से अधिक वक्त लगा दिया।
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विवि और उसके संबद्ध कॉलेजों में फिलहाल खेल की हालत बहुत ही बदतर है। क्रिकेट सहित दो खेल के अलावा किसी में भी कोच नहीं है। कई खेल के न तो मैदान है और न ही सामग्रियां। इनडोर खेल की हालत ज्यादा ही बदतर है। खेल की दशा को सुधारने के लिए खेल नीति बनाने के लिए लंबा समय लगाया गया। नीति बनने के बाद एक्जीक्यूटिव कमेटी ने पास कर दिया है। अब उसे नोटिफिकेशन के लिए रजिस्ट्रार के पास भेजा गया है।
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उधर, यूजीसी ने भी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खेल की स्थिति को सुधारने के लिए प्रस्ताव मांगा। इसके लिए उसने अक्तूबर तक का ही समय निर्धारित किया था लेकिन विवि प्रशासन उसे दिसंबर तक भेज पाया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव प्रो. आरके उपाध्याय ने कहा कि अभी खेल नीति का नोटिफिकेशन हुआ नहीं है जबकि यूजीसी को प्रस्ताव भेज दिया गया है। विवि में खेल नीति घोषित न होने से विवि के खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते विवि अंतरविश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में एक-एक पदक के लिए तरसता है।
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