इलाहाबाद विश्वविद्यालय बीए प्रथम वर्ष और पीजी प्रथम सेमेस्टर के छात्रों का भी होगा प्रमोशन
- इविवि की परीक्षा समिति ने लिया निर्णय, बिना परीक्षा किए जाएंगे प्रमोट
- प्रमोशन से संतुष्ट नहीं हैं स्नातक के छात्र तो सितंबर में दे सकते हैं परीक्षा
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष और परास्नातक (पीजी) एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों के प्रथम सेमेस्टर के छात्रों को भी बिना परीक्षा अगले सत्र में प्रमोट किए जाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को यह सुविधा भी दी है कि अगर वे प्रमोशन से संतुष्ट नहीं है और उन्हें लगता है कि परीक्षा के माध्यम से वह बेहतर अंक प्राप्त कर सकते हैं तो उनके सामने परीक्षा में शामिल होने का विकल्प भी है।
इविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह के अनुसार परीक्षा सितंबर में प्रस्तावित है, लेकिन परीक्षा का आयोजन तभी होगा, जब उस वक्त की कोविड से जुड़ी परिस्थितियां इसके लिए अनुमति देंगी। प्रथम से द्वितीय वर्ष में प्रमोट किए जाने वाले छात्रों के प्रथम वर्ष के प्राप्ताकों का निर्धारण अगले साल द्वितीय वर्ष की परीक्षा में मिले प्राप्तांकों के आधार पर होगा। द्वितीय वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रथम वर्ष के अंक निर्धारित किए जाएंगे। वहीं, जो छात्र सितंबर में प्रस्तावित स्नातक प्रथम वर्ष की परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें संबंधित इकाई यानी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के काउंटर या कॉलेज के काउंटर पर अपना पूरा विवरण उपलब्ध कराना होगा।
न्यूनतम 60 फीसदी अंक देने की मांग खारिज
छात्र मांग कर रहे थे कि पीजी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों के अंतिम सेमेस्टर के सभी छात्रों को बिना परीक्षा प्रमोशन दिया जाए और स्नातक तृतीय वर्ष के छात्रों को न्यूनतम 60 फीसदी अंकों के साथ प्रमोट किया जाए। परीक्षा समिति ने छात्रों इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया है। समिति की ओर से कहा गया है कि छात्रों की इन मांगों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
अंतिम एवं सम सेमेस्टर की परीक्षाएं अक्तूबर में
पीजी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में प्रथम सेमेस्टर समेत सभी विषम सेमेस्टर के छात्रों को बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट किया जाएगा, जबकि अंतिम एवं सम सेमेस्टर की परीक्षाएं अक्तूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित की गई हैं। विभागों/सेंटर्स से अपेक्षा की गई है कि वे अगस्त 2021 के अंत तक पाठ्यक्रम एवं आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया को पूरी कर लेंगे।
स्नातक तृतीय वर्ष की अंक सुधार परीक्षा अब मुश्किल
परीक्षा समिति की बैठक में यह चर्चा भी हुई कि कोविड-19 की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन स्नातक तृतीय वर्ष की अंक सुधार परीक्षा करा पाने में असमर्थ है। हालांकि लगातार दो साल प्रमोशन मिलने के कारण स्नातक तृतीय वर्ष के छात्रों पिछले साल द्वितीय से तृतीय वर्ष में 10 फीसदी का अतिरिक्त इंक्रीमेंट देकर प्रमोट किया गया था और इस बार तृतीय वर्ष में सात फीसदी का इंक्रीमेंट दिया गया है। इस आधार पर उनकी द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की मार्कशीट जारी की गई है।
इस फार्मूले से प्रमोट होंगे सेमेस्टर के नियमित छात्र
- सेमेस्टर के छात्रों के लिए निर्धारित उत्तीर्णांक ही छात्रों का न्यूनतम प्राप्तांक होगा और अधिकतम प्राप्तांक पेपर के पूर्णांक से दो अंक कम होगा।
- आंतरिक मूल्यांकन और सेमेस्टर की अंतिम परीक्षा में अलग-अलग न्यूनतम उत्तीर्णांक दिए जाएंगे
- संबंधित विभागों/सेंटर्स के विभागाध्यक्ष/समन्वयक की ओर से आंतरिक मूल्यांकन के प्राप्तांक परीक्षा नियंत्रक कार्यालय को उपलब्ध कराए जाएंगे
- आंतरिक परीक्षा के प्राप्तांक का डेढ़ गुना अंक अंतिम परीक्षा के लिए निर्धारित होगा या ऑनलाइन परीक्षा में मूल्यांकन आधार पर प्राप्तांक दिए जाएंगे (दोनों में जो भी अधिक हो)।
इस फार्मूले से प्रमोट होंगे भूतपूर्व/अनुत्तीर्ण छात्र
- प्रमोशन का जो फार्मूला सेमेस्टर के नियमित छात्रों के लिए है, वही सेमेस्टर के भूतपूर्व/अनुत्तीर्ण छात्रों के लिए निर्धारित किया गया है। फर्क बस इतना होगा कि आंतरिक परीक्षा के प्राप्तांक का डेढ़ गुना अंक अंतिम परीक्षा के लिए निर्धारित होगा या पुरानी परीक्षा के आधार पर मिले अंकों पर 10 फीसदी का अतिरिक्त इंक्रीमेंट देते हुए प्राप्तांक निर्धारित किए जाएंगे (दोनों में जो भी अधिक हो)