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क्यों न गिरे रैंकिंग, शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली
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ऑटा, ऑक्टा अध्यक्ष ने कहा, भर्तियां नहीं हुईं तो न्यायालय की शरण में जाएंगे
प्रो. शास्त्री समेत कुछ रिटायर शिक्षकों पर इविवि की छवि धूमिल करने का आरोप
प्रयागराज। ऑटा के पूर्व अध्यक्ष एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के संस्कृत विभाग के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. राम किशोर शास्त्री समेत कुछ अन्य रिटायर शिक्षक इविवि की एनआईआरएफ रैंकिंग गिरने के लिए कुलपति को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन इसमें कुलपति का क्या दोष, शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं तो रैंकिंग क्यों नहीं गिरेगी। रविवार को ऑटा एवं ऑक्टा पदाधिकारियों ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इन्हीं तर्कों के साथ विश्वविद्यालय का पक्ष रखा।
ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे एवं महासचिव प्रो. शिवमोहन प्रसाद और ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह एवं महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रो. राम किशोर शास्त्री और कुछ अन्य रिटायर शिक्षक इविवि की छवि को धूमिल कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि इविवि में शिक्षक भर्ती हो ताकि उनकी दादागिरी चलती रहे। ऑटा एवं ऑक्टा पदाधिकारियों ने कहा कि इन्हीं लोगों की वजह से विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती नहीं आ रही है। अगर मंत्रालय शिक्षक भर्ती की अनुमति जल्द नहीं देता है तो ऑटा और ऑक्टा के पदाधिकारी न्यायालय की शरण में जाएंगे।
दीक्षांत समारोह में डीजीपी ओपी सिंह को मानद उपाधि दिए जाने के विरोध के मुद्दे पर कहा कि डीपीजी इविवि या कुलपति के किसी भी मामले की जांच नहीं कर रहे हैं। बल्कि आरोप लगाने वाले खुद तमाम जांचों में फंसे हैं। कॉलेजों में पीजी और पीएचडी का विरोध करने, जायज प्रोन्नति, भर्ती को फर्जी बताने वाले को अपनी प्रोन्नति फर्जी नहीं लगी जबकि यही लोग जांच में फंसे हैं और केवल इसलिए शोर बचा रहे हैं ताकि कार्रवाई से बचने के लिए इविवि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
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इविवि के 11 विभागों में एक शिक्षक भी नहीं
इविवि में शिक्षकों के 850 से अधिक पद सृजित हैं और इनमें से 566 पद रिक्त पड़े हैं। बाकी शिक्षकों में आधे से अधिक अगले एक-दो साल में रिटायर होने जा रहे हैं। कम से कम 11 विभाग ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं। ये विभाग केवल अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे चल रहे हैं। इनमें कंप्यूटर एजूकेशन, एक्पेरिमेंटल मीनरोलॉजी एंड पेट्रोलियम खनिज एवं पेट्रोलियम, फिल्म एंड थियेटर, गांधियन स्टडीज, विजुअल आर्ट, इंउियन उयसपोरा, इंग्लिश लैंग्वेज, नैनो टेक्नोलॉजी, फोटो जर्नलिज्म, साथ एरिशय स्टडीज विभाग शामिल हैं। इसके अलावा रसायन शास्त्र विभाग में 50 में से 42 पद, अर्थशास्त्र में 32 में से 20, मध्यकालीन इतिहास विभाग में 38 में से 30, गणित में 31 में से 20, इंग्लिश में 45 में से 31, जीव विज्ञान में 30 में से 26 पद खाली हैं। कई अन्य विभागों की भी यही हालत है।
शिक्षकों की कम संख्या से भी गिरी रैंकिंग
ऑटा और ऑक्टा पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों की कम संख्या इविवि की रैंकिंग गिरने का प्रमुख कारण है। शिक्षकों की कमी के कारण न तो ठीक से पढ़ाई हो पाती है, न तो अच्छे रिसर्च पेपर लिखे जा सकते हैं और न ही कोई प्रोजेक्ट ले पाते है। सेमिनार भी पर्याप्त संख्या में आयोजित नहीं हो पात हैं और रैकिंग निर्धारण में इन सभी की भूमिका प्रमुख है।
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प्रो. शास्त्री समेत कुछ रिटायर शिक्षकों पर इविवि की छवि धूमिल करने का आरोप
प्रयागराज। ऑटा के पूर्व अध्यक्ष एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के संस्कृत विभाग के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. राम किशोर शास्त्री समेत कुछ अन्य रिटायर शिक्षक इविवि की एनआईआरएफ रैंकिंग गिरने के लिए कुलपति को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन इसमें कुलपति का क्या दोष, शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं तो रैंकिंग क्यों नहीं गिरेगी। रविवार को ऑटा एवं ऑक्टा पदाधिकारियों ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इन्हीं तर्कों के साथ विश्वविद्यालय का पक्ष रखा।
ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे एवं महासचिव प्रो. शिवमोहन प्रसाद और ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. एसपी सिंह एवं महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रो. राम किशोर शास्त्री और कुछ अन्य रिटायर शिक्षक इविवि की छवि को धूमिल कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि इविवि में शिक्षक भर्ती हो ताकि उनकी दादागिरी चलती रहे। ऑटा एवं ऑक्टा पदाधिकारियों ने कहा कि इन्हीं लोगों की वजह से विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती नहीं आ रही है। अगर मंत्रालय शिक्षक भर्ती की अनुमति जल्द नहीं देता है तो ऑटा और ऑक्टा के पदाधिकारी न्यायालय की शरण में जाएंगे।
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दीक्षांत समारोह में डीजीपी ओपी सिंह को मानद उपाधि दिए जाने के विरोध के मुद्दे पर कहा कि डीपीजी इविवि या कुलपति के किसी भी मामले की जांच नहीं कर रहे हैं। बल्कि आरोप लगाने वाले खुद तमाम जांचों में फंसे हैं। कॉलेजों में पीजी और पीएचडी का विरोध करने, जायज प्रोन्नति, भर्ती को फर्जी बताने वाले को अपनी प्रोन्नति फर्जी नहीं लगी जबकि यही लोग जांच में फंसे हैं और केवल इसलिए शोर बचा रहे हैं ताकि कार्रवाई से बचने के लिए इविवि प्रशासन पर दबाव बनाया जा सके।
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इविवि के 11 विभागों में एक शिक्षक भी नहीं
इविवि में शिक्षकों के 850 से अधिक पद सृजित हैं और इनमें से 566 पद रिक्त पड़े हैं। बाकी शिक्षकों में आधे से अधिक अगले एक-दो साल में रिटायर होने जा रहे हैं। कम से कम 11 विभाग ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं। ये विभाग केवल अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे चल रहे हैं। इनमें कंप्यूटर एजूकेशन, एक्पेरिमेंटल मीनरोलॉजी एंड पेट्रोलियम खनिज एवं पेट्रोलियम, फिल्म एंड थियेटर, गांधियन स्टडीज, विजुअल आर्ट, इंउियन उयसपोरा, इंग्लिश लैंग्वेज, नैनो टेक्नोलॉजी, फोटो जर्नलिज्म, साथ एरिशय स्टडीज विभाग शामिल हैं। इसके अलावा रसायन शास्त्र विभाग में 50 में से 42 पद, अर्थशास्त्र में 32 में से 20, मध्यकालीन इतिहास विभाग में 38 में से 30, गणित में 31 में से 20, इंग्लिश में 45 में से 31, जीव विज्ञान में 30 में से 26 पद खाली हैं। कई अन्य विभागों की भी यही हालत है।
शिक्षकों की कम संख्या से भी गिरी रैंकिंग
ऑटा और ऑक्टा पदाधिकारियों का कहना है कि शिक्षकों की कम संख्या इविवि की रैंकिंग गिरने का प्रमुख कारण है। शिक्षकों की कमी के कारण न तो ठीक से पढ़ाई हो पाती है, न तो अच्छे रिसर्च पेपर लिखे जा सकते हैं और न ही कोई प्रोजेक्ट ले पाते है। सेमिनार भी पर्याप्त संख्या में आयोजित नहीं हो पात हैं और रैकिंग निर्धारण में इन सभी की भूमिका प्रमुख है।