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सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ना अनुचित
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Jan 2016 01:01 AM IST
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काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि शास्त्रों में भी वर्णित है कि महिलाओं को शनि पूजा नहीं करनी चाहिए। सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने का कोई लाभ नहीं है। धर्म में समान अधिकार की बात गलत है क्योंकि प्रकृति ने ही महिला पुरष में भेद किया है। हमारी संस्कृति में महिलाओं को हमेशा स्वतंत्रता दी है लेकिन स्वच्छंदता नहीं। शनि मंदिर में प्रवेश की मांग जो महिलाएं कर रही हैं वह स्वच्छंदता है। जो महिलाओं के लिए अहितकारी है। देवी प्रतिमाओं की प्रतिमा का स्पर्श तो किसी को भी नहीं करना चाहिए।
वहीं हाईकोर्ट के अधिवक्ता शरद चंद्र मिश्र ने भी कहा है कि ऋषि पत्नियों लोपा, मुद्रा, घोषा ने रचनाएं की है। मम्मट की पत्नी भामती ने शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया। ऐसे में महिलाओं का शनि पूजन करना शास्त्र विरुद्ध नहीं हो सकता। हाईकोर्ट अधिवक्ता पूजा मिश्रा ने कहा कि शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश उनके धार्मिक अधिकारों का हनन है। उन्हें पूजन से रोकने का कोई औचित्य नहीं है।
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वहीं हाईकोर्ट के अधिवक्ता शरद चंद्र मिश्र ने भी कहा है कि ऋषि पत्नियों लोपा, मुद्रा, घोषा ने रचनाएं की है। मम्मट की पत्नी भामती ने शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया। ऐसे में महिलाओं का शनि पूजन करना शास्त्र विरुद्ध नहीं हो सकता। हाईकोर्ट अधिवक्ता पूजा मिश्रा ने कहा कि शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश उनके धार्मिक अधिकारों का हनन है। उन्हें पूजन से रोकने का कोई औचित्य नहीं है।
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