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चुनावी खुन्नस में युवक को गोलियों से किया छलनी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 18 Dec 2015 12:46 AM IST
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पड़ोसी जिले जौनपुर के रामपुर इलाके में प्रधान पद के उम्मीदवार रहे द्रवेश दीक्षित को गोलियों से छलनी करने के बाद उसकी लाश हंडिया इलाके में फेंक दी गई। बृहस्पतिवार सुबह लोगों ने समहा गांव के पास लावारिस शव देखा तो पुलिस को खबर दी। कमीज में लगे टेलर के लेबल के सहारे पहचान होने के बाद परिवार के लोग भी हंडिया थाने आ गए। उन्होंने निर्वाचित प्रधान और उसके भाई पर अपहरण और हत्या का आरोप लगाया है। चुनाव के दौरान और नतीजा आने के बाद उसे धमकी दी गई थी मगर बार-बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया।
हंडिया के बरौत इलाके में जीटी रोड से करीब सात किलोमीटर दूर समहा गांव के निकट बृहस्पतिवार सुबह लोगों ने करीब 32 साल के युवक की रंक्तरंजित लाश देखी तो हल्ला मचा। खबर फैली तो कुछ ही देर में वहां भीड़ जमा हो गई। सूचना पाकर पहले बरौत चौकी प्रभारी रामप्रवेश यादव फिर थाना प्रभारी राकेश सिंह आ गए। शव के निरीक्षण पर पता चला कि युवक के सीने पर पांच गोलियां मारी गई थीं। पुलिस का अनुमान है कि फायर पिस्टल से किए गए थे। उसके कपड़ों की तलाशी में ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे शिनाख्त हो सकती। कमीज के कॉलर पर वीआईपी टेलर रामपुर जौनपुर का लेबल लगा था। पुलिस ने रामपुर में टेलर तथा पुलिस से संपर्क किया तो मृतक की पहचान हो गई। वह रामपुर इलाके के आशापुर गांव में रहने वाले राजपति दीक्षित के पांच पुत्रों में छोटा द्रवेश दीक्षित उर्फ जज था।
वह बुधवार सुबह करीब दस बजे घर से बाइक पर रामपुर बाजार के लिए निकला था। फिर लौटा नहीं। उसे करीब तीन बजे रामपुर की तरफ जाते देखा गया था मगर वहां नहीं पहुंचा। ऐसे में शक है कि उसे बीच से ही अगवा कर लिया गया। बुधवार रात ही आशापुर के नवनिर्वाचित प्रधान सुधाकर दीक्षित और उसके भाई दिनकर के खिलाफ अपहरण का नामजद केस लिखाया गया था। खबर पाकर हंडिया थाने आए द्रवेश के भाई दलसिंगार ने बताया कि उन्हें प्रधान सुधाकर पर ही कत्ल का शक है। दरअसल, द्रवेश सूरत में ऑटो चलाकर गुजारा करता था।
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अबकी उसने गांव आकर प्रधान के चुनाव में ताल ठोंक दी थी। विरोधी प्रत्याशी सुधाकर ने उसे तीन लाख रुपये लेकर चुनाव से हटने का दबाव दिया मगर वह नहीं माना। मतगणना से एक रोज पहले भी सुधाकर ने द्रवेश को धमकी दी थी कि परिणाम आने दो। तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा। इस पर द्रवेश ने थाने में लिखित शिकायत की लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। 13 दिसंबर को मतगणना में जीत हासिल होने पर फिर धमकाया गया तो उसने एसपी जौनपुर को फैक्स से शिकायती पत्र भेजकर सुरक्षा की फरियाद की पर कुछ भी नही हो सका।
भाई दलसिंगार का आरोप है कि बुधवार को प्रधान सुधाकर ने ही अपने लोगों के साथ मिलकर रास्ते से द्रवेश को गाड़ी में खींचकर गोलियों से छलनी कर दिया। फिर लाश वहां से 60 किलोमीटर दूर लाकर हंडिया में फेंक दी। द्रवेश की पत्नी अल्का शिक्षा मित्र है। उसके दो बेटे हैं। छह साल का ऋषि और चार साल का ऋतिक। सबसे बड़ी बेटी रोली आठ साल की है। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया है।
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हंडिया के बरौत इलाके में जीटी रोड से करीब सात किलोमीटर दूर समहा गांव के निकट बृहस्पतिवार सुबह लोगों ने करीब 32 साल के युवक की रंक्तरंजित लाश देखी तो हल्ला मचा। खबर फैली तो कुछ ही देर में वहां भीड़ जमा हो गई। सूचना पाकर पहले बरौत चौकी प्रभारी रामप्रवेश यादव फिर थाना प्रभारी राकेश सिंह आ गए। शव के निरीक्षण पर पता चला कि युवक के सीने पर पांच गोलियां मारी गई थीं। पुलिस का अनुमान है कि फायर पिस्टल से किए गए थे। उसके कपड़ों की तलाशी में ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे शिनाख्त हो सकती। कमीज के कॉलर पर वीआईपी टेलर रामपुर जौनपुर का लेबल लगा था। पुलिस ने रामपुर में टेलर तथा पुलिस से संपर्क किया तो मृतक की पहचान हो गई। वह रामपुर इलाके के आशापुर गांव में रहने वाले राजपति दीक्षित के पांच पुत्रों में छोटा द्रवेश दीक्षित उर्फ जज था।
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वह बुधवार सुबह करीब दस बजे घर से बाइक पर रामपुर बाजार के लिए निकला था। फिर लौटा नहीं। उसे करीब तीन बजे रामपुर की तरफ जाते देखा गया था मगर वहां नहीं पहुंचा। ऐसे में शक है कि उसे बीच से ही अगवा कर लिया गया। बुधवार रात ही आशापुर के नवनिर्वाचित प्रधान सुधाकर दीक्षित और उसके भाई दिनकर के खिलाफ अपहरण का नामजद केस लिखाया गया था। खबर पाकर हंडिया थाने आए द्रवेश के भाई दलसिंगार ने बताया कि उन्हें प्रधान सुधाकर पर ही कत्ल का शक है। दरअसल, द्रवेश सूरत में ऑटो चलाकर गुजारा करता था।
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अबकी उसने गांव आकर प्रधान के चुनाव में ताल ठोंक दी थी। विरोधी प्रत्याशी सुधाकर ने उसे तीन लाख रुपये लेकर चुनाव से हटने का दबाव दिया मगर वह नहीं माना। मतगणना से एक रोज पहले भी सुधाकर ने द्रवेश को धमकी दी थी कि परिणाम आने दो। तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ा जाएगा। इस पर द्रवेश ने थाने में लिखित शिकायत की लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। 13 दिसंबर को मतगणना में जीत हासिल होने पर फिर धमकाया गया तो उसने एसपी जौनपुर को फैक्स से शिकायती पत्र भेजकर सुरक्षा की फरियाद की पर कुछ भी नही हो सका।
भाई दलसिंगार का आरोप है कि बुधवार को प्रधान सुधाकर ने ही अपने लोगों के साथ मिलकर रास्ते से द्रवेश को गाड़ी में खींचकर गोलियों से छलनी कर दिया। फिर लाश वहां से 60 किलोमीटर दूर लाकर हंडिया में फेंक दी। द्रवेश की पत्नी अल्का शिक्षा मित्र है। उसके दो बेटे हैं। छह साल का ऋषि और चार साल का ऋतिक। सबसे बड़ी बेटी रोली आठ साल की है। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया है।