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छात्रों के मुद्दों पर हावी रहा आरोप-प्रत्यारोप
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 28 Sep 2015 11:50 PM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में सोमवार को हुए दक्षता भाषण में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने हमेशा साथ देने के वादे के साथ विद्यार्थियों से वोट मांगे। हालांकि ,प्रत्याशियों का संक्षिप्त संबोधन भी परिसर के मुद्दों से भटका हुआ था। परिसर की समस्याआें के बजाय उनका संबोधन आरोप-प्रत्यारोप पर ही केंद्रित रहा तो कई ने संघर्षों के नाम पर वोट मांगे। दक्षता भाषण के प्रति आम छात्र-छात्राओं में पहले जैसा उत्साह नहीं दिखा। हालांकि, समर्थकों का भारी जमावड़ा रहा।
दक्षता भाषण की शुरुआत उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियाें से हुई। उन्हें बात रखने के लिए पांच मिनट दिए गए। उपाध्यक्ष पद के सभी सात प्रत्याशियों आदेश शर्मा, अभिषेक कुशवाहा, अनुभव सिंह, फैजल मंसूर, राहुल यादव, विक्रांत सिंह, विशाखा दरबारी ने वाई-फाई परिसर, छेड़खानी, नियमित कक्षाएं आदि मुद्दे उठाए। उन्हाेंने स्वस्थ और मजबूत छात्रसंघ के नाम पर भी वोट मांगे। इसके बाद अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को सात मिनट बोलने के लिए मिले। सबसे पहले आए एनएसयूआई के आदित्य कुमार राय ने विश्वविद्यालय की समस्याओं के निदान में खुद को कृष्ण की भूमिका में खड़ा कर दिया तो आदित्य के बाद आए रजनीश सिंह ने राम मंदिर के मुद्दे पर एबीवीपी के नेताओं को घेरने की कोशिश की।
रजनीश ने कहा कि संघर्षों की वजह से उन पर मुकदमे लगे हैं। रिचा सिंह ने छात्रसंघ को अराजकता का अड्डा बताते हुए इसके खिलाफ संघर्ष की बात कही। उन्होंने हॉस्टल खाली कराने के विरोध में खुद के संघर्षों को भी विद्यार्थियों के समक्ष रखा। आइसा के रुस्तम कुरैशी ने हॉस्टल को अराजकता से मुक्त कराने के लिए शुरू कानूनी तथा सड़क पर आंदोलन का जिक्र किया। एबीवीपी के सर्वम द्विवेदी ने लोक सेवा आयोग के मुद्दों पर किए गए संघर्षों के साथ विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, सभी के लिए हॉस्टल, डेलीगेसी के विद्यार्थियों के मुद्दे उठाए। दक्षता भाषण के दौरान समर्थक प्रत्याशियों का लगातार हौसला बढ़ाते रहे तो विरोधी की हूटिंग भी हुई। संबोधन के दौरान लगातार नारेबाजी होती रही। कई प्रत्याशी खुद का भाषण समाप्त होने के बाद बीच में ही चले गए। इसे परंपरा के विरोध में बताते हुए आम विद्यार्थियों में नाराजगी भी रही। दक्षता भाषण का संचालन डीएसडब्ल्यू डॉ.एआर सिद्दीकी ने किया। इस मौके पर चुनाव अधिकारी प्रो. आरएस पांडेय तथा अन्य शिक्षकों के अलावा पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, लक्ष्मी शंकर ओझा, केके राय, कृष्ण मूर्ति यादव, हेमंत सिंह टुन्नू, अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
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दक्षता भाषण की शुरुआत उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशियाें से हुई। उन्हें बात रखने के लिए पांच मिनट दिए गए। उपाध्यक्ष पद के सभी सात प्रत्याशियों आदेश शर्मा, अभिषेक कुशवाहा, अनुभव सिंह, फैजल मंसूर, राहुल यादव, विक्रांत सिंह, विशाखा दरबारी ने वाई-फाई परिसर, छेड़खानी, नियमित कक्षाएं आदि मुद्दे उठाए। उन्हाेंने स्वस्थ और मजबूत छात्रसंघ के नाम पर भी वोट मांगे। इसके बाद अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को सात मिनट बोलने के लिए मिले। सबसे पहले आए एनएसयूआई के आदित्य कुमार राय ने विश्वविद्यालय की समस्याओं के निदान में खुद को कृष्ण की भूमिका में खड़ा कर दिया तो आदित्य के बाद आए रजनीश सिंह ने राम मंदिर के मुद्दे पर एबीवीपी के नेताओं को घेरने की कोशिश की।
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रजनीश ने कहा कि संघर्षों की वजह से उन पर मुकदमे लगे हैं। रिचा सिंह ने छात्रसंघ को अराजकता का अड्डा बताते हुए इसके खिलाफ संघर्ष की बात कही। उन्होंने हॉस्टल खाली कराने के विरोध में खुद के संघर्षों को भी विद्यार्थियों के समक्ष रखा। आइसा के रुस्तम कुरैशी ने हॉस्टल को अराजकता से मुक्त कराने के लिए शुरू कानूनी तथा सड़क पर आंदोलन का जिक्र किया। एबीवीपी के सर्वम द्विवेदी ने लोक सेवा आयोग के मुद्दों पर किए गए संघर्षों के साथ विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, सभी के लिए हॉस्टल, डेलीगेसी के विद्यार्थियों के मुद्दे उठाए। दक्षता भाषण के दौरान समर्थक प्रत्याशियों का लगातार हौसला बढ़ाते रहे तो विरोधी की हूटिंग भी हुई। संबोधन के दौरान लगातार नारेबाजी होती रही। कई प्रत्याशी खुद का भाषण समाप्त होने के बाद बीच में ही चले गए। इसे परंपरा के विरोध में बताते हुए आम विद्यार्थियों में नाराजगी भी रही। दक्षता भाषण का संचालन डीएसडब्ल्यू डॉ.एआर सिद्दीकी ने किया। इस मौके पर चुनाव अधिकारी प्रो. आरएस पांडेय तथा अन्य शिक्षकों के अलावा पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, लक्ष्मी शंकर ओझा, केके राय, कृष्ण मूर्ति यादव, हेमंत सिंह टुन्नू, अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
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