फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   allahabad news

बिना पढ़ाई के ही परीक्षा देंगे इविवि-कालेज के छात्र

Thu, 25 Feb 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 25 Feb 2016 12:57 AM IST
विज्ञापन
allahabad news
इलाहाबाद विश्वविद्यालय का राजनीति विज्ञान विभाग। दिन बुधवार। दिन में एक बजे। पहले तल पर सेमिनार चल रहा था। उसमें कुछ शिक्षक मौजूद थे। जबकि, इस दौरान विभाग के ज्यादातर शिक्षकों के कक्ष खाली थे। कक्षाएं भी नहीं चल रही थीं। एक क्लास चल रही थी, लेकिन उसमें भी गिनती के छात्र थे।
विज्ञापन


बीए प्रथम वर्ष के छात्र ने बताया कि विभाग के एक शिक्षक ने पूरे सत्र में कुछ कक्षाएं लीं। एक अन्य ने तो शुरू में कक्षाएं नहीं लीं। अब कुछ दिनों से कोर्स पूरा करने में लगे हैं। एक अन्य छात्र का कहना था कि स्नातक की ज्यादातर कक्षाएं रिसर्च स्कॉलर लेेते हैं। एक  प्रोफेसर तो बिना छुट्टी लिए विदेश तक चले जाते हैं। उनकी शिकायत भी हो चुकी है।
विज्ञापन


प्राचीन इतिहास विभाग में भी कमोवेश यही स्थिति रही। विभाग की एक प्रोफेसर तो पूरे सत्र में कुछ दिन दिखीं। उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई बार विवाद भी हो चुका है। नियमित कक्षाएं न चलने और कई शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत सिर्फ इन दो विभागों की नहीं हैं। कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर विभागों में एक-दो शिक्षक हैं जो ज्यादातर दिन गायब रहते हैं। मध्यकालीन इतिहास की एक शिक्षक भी कभी-कभार आती हैं। छात्रों के अनुसार अंग्रेजी विभाग में इस तरह की अधिक शिकायत है। एक प्रोफेसर की क्लास तो उनके रिश्तेदार लेते हैं। अंग्रेजी विभाग की तरह कॉमर्स में भी इस तरह की शिकायत अधिक हैं। छात्रों ने बताया कि विभाग के कई शिक्षक कोचिंग चलाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में स्नातक की परीक्षाएं शुरू होने में अब मात्र 15 दिन रह गए हैं, लेकिन कई विषयों में अभी 75 फीसदी ही कोर्स पूरा हो पाया है। कई शिक्षकों ने तो पूरे सत्र में गिनती की ही कक्षाएं लीं। हालांकि इनमें कई हैं, जिन्होंने शुरू में तो नहीं पढ़ाया और अब कोर्स पूरा करने की जल्दबाजी में हैं। इनमें कई प्रोफेसर हैं, जिन्हें हर महीने तकरीबन डेढ़ लाख रुपये वेतन मिलता है, लेकिन पढ़ाने और रिसर्च के बजाय उनकी व्यस्तता कहीं और रहती है। कई तो विश्वविद्यालय की राजनीति करने में ज्यादा समय देते हैं।

लोकतांत्रिक छात्र संगठन के बैनर तले छात्र-छात्राओं के एक गुट ने विभागवार सर्वे कराया था। इसमें कक्षाएं नहीं चलने तथा पढ़ाई समझ में नहीं आने की बात सामने आई थी। संगठन की ओर से पिछले साल इसकी पूरी रिपोर्ट कुलपति को दी गई थी। इस साल हुृए सर्वे में छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों के बीच राजनीति को भी विश्वविद्यालय के लिए घातक बताया।

पिछले साल जेके इंस्टीट्यूट के शिक्षक को छात्रों ने बेरहमी से पीट दिया था। इलाहाबाद डिग्री कालेज में भी एक शिक्षक की कुछ अराजक तत्वों ने पिटाई की थी। इसकी वजह से विश्वविद्यालय और एडीसी में कई दिनों तो पढ़ाई बाधित रही। शिक्षकाें ने सड़क पर मार्च भी किया। विश्वविद्यालय और कालेजों में शिक्षकाें के साथ हाथापाई सहित कई अन्य घटनाएं भी हो चुकी हैं। उनके साथ बदतमीजी, अपशब्द कहने की तो ढेरों शिकायतें हैं। आंदोलन के दौरान उन्हें अपशब्द कहना तो कॉमन हो गया है।

शिक्षकों के सम्मान में गिरावट के पीछे उनके आचरण को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। इसमें प्रमुख है कक्षाओं से उनका दूर रहना और ठीक से न पढ़ाना। इसके अलावा शिक्षकों के बीच सियासत भी उनके सम्मान में आई कमी की मुख्य मानी जाती है। एक वरिष्ठ शिक्षक का कहना है कि कई शिक्षक आपसी विवाद या वर्चस्व की लड़ाई में छात्र नेताओं का इस्तेमाल करने से भी परहेज नहीं करते। इससे सभी का मान गिरा है। उनका यह भी कहना है कि जो शिक्षक पढ़ाते हैं उनके सम्मान में छात्र-छात्रा ही नहीं कई प्रोफेसर भी जब तक वह कह न दें बैठने की हिम्मत नहीं करते। प्रोफेसर एनआर फारूकी, प्रोफेसर माता अंबर तिवारी ऐसे ही शिक्षकों में से हैं। हालांकि इन्हें भी शिक्षकाें की सियासत का शिकार होना पड़ा था, लेकिन इससे उन्हें अपमानित करने वालोें को ही लज्जित होना पड़ा था।

विश्वविद्यालय में शिक्षकों को परीक्षा की ड्यूटी तथा कॉपियों के मूल्यांकन का काम भी नहीं भाता। कई शिक्षक तो परीक्षा में ड्यूटी को अपमान समझते हैं। तकरीबन हर साल परीक्षा विभाग की ओर से ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर कुलपति को दी जाती है। उन्हें नोटिस भेजा जाता है, लेकिन यह शिकायत बनी है। यही स्थिति मूल्यांकन को लेकर भी है। इसकी वजह से रिजल्ट भी समय से नहीं घोषित हो पाता। पिछले साल तो एक शिक्षक उत्तर पुस्तिकाएं कमरे में बंद करके विदेश चले गए। एक विषय की तो कापी ही गुम हो गई। इस वजह से कई शिक्षकों को इस कारण नोटिस भेजा जा चुका है।


विश्वविद्यालय और कालेजों के कई शिक्षकों के कोचिंग में पढ़ाने की भी शिकायत है। संगीत विभाग के छात्र-छात्राओं ने तो इसके खिलाफ आंदोलन तक चलाया था। इसके बाद इसकी जांच भी कराई गई। हालांकि कोई कार्रवाई नहीं हुई। वाणिज्य विभाग के कई शिक्षकाें के भी कोचिंग में पढ़ाने की शिकायत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed