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सच बोलती हैं किताबें
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 04 Sep 2015 01:54 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। मीरा फाउंडेशन और साहित्य भंडार के संयुक्त तत्वावधान में निराला सभागार में चल रही पुस्तक प्रदर्शनी के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को ‘किताबें सच बोलती हैं’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा कि सच हमारी समझ की सीमा है और हर एक का सच कहीं न कहीं उनकी समझ की सीमा है। अपने सच को बोलना का बड़ी बात है और उस सच को किताब का रूप दिया जाना ही आज के विषय की प्रासंगिकता और प्रमाणिकता है कि किताबें सच बोलती हैं।
प्रणय कृष्ण ने कहा कि सत्य वही है जिसे प्रमाणित किया जा सके। प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि अनुभव और ज्ञान के मेल से ही सच का रचा जाता है। किताबें ही हमें रास्ता सुझाती हैं। भावरस डिग्री कॉलेज सोनभद्र के रमाकांत राय ने कहा कि किताबें सच बोलती हैं, इसकी प्रमाणिकता रामचरित मानस है। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। इस दौरान श्रीरंग, धनंजय चोपड़ा, सतीश चंद्र अग्रवाल, विभोर अग्रवाल, डॉ. शांति चौधरी, वीरेंद्र तिवारी, नंदल हितैषी, मेवाराम आदि मौजूद रहे।
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प्रणय कृष्ण ने कहा कि सत्य वही है जिसे प्रमाणित किया जा सके। प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि अनुभव और ज्ञान के मेल से ही सच का रचा जाता है। किताबें ही हमें रास्ता सुझाती हैं। भावरस डिग्री कॉलेज सोनभद्र के रमाकांत राय ने कहा कि किताबें सच बोलती हैं, इसकी प्रमाणिकता रामचरित मानस है। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरुषार्थी ने किया। इस दौरान श्रीरंग, धनंजय चोपड़ा, सतीश चंद्र अग्रवाल, विभोर अग्रवाल, डॉ. शांति चौधरी, वीरेंद्र तिवारी, नंदल हितैषी, मेवाराम आदि मौजूद रहे।
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