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सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 24 Feb 2016 11:51 PM IST
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यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों द्वारा भूमि आवंटन में घोटाला कर राजस्व की क्षति पहुंचाने के मामले में आरोपी अधिकारी अनिल वर्मा और अधिशासी अभियंता संजय तिवारी को सीबीआई द्वारा क्लीन चिट देने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका पर एक मार्च को सुनवाई होगी।
कृष्ण प्रताप कौशिक ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि अनिल वर्मा ने अपनी पत्नी की फर्म के नाम राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नौ करोड़ रुपये की भूमि मात्र 17 लाख रुपये में आवंटित कर दी। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि मेसर्स इंडस एजूकेशन सोसाइटी को इंजीनियरिंग कालेज के लिए 25 एकड़ भूमि दी गई।
इसी प्रकार से अनिल वर्मा की पत्नी नीना वर्मा की पार्टनर फर्म मेसर्स डिजाइन इन कारपोरेट्स को भी करोड़ों की जमीन कौड़ी के भाव में देकर सरकार को आठ करोड़ 90 लाख रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई गई। सीबीआई ने इस मामले में यह कहते हुए वर्मा को क्लीन चिट दे दी है कि आवंटन मुख्यालय द्वारा किया गया है, इसमें वर्मा की कोई भूमिका नहीं है।
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कृष्ण प्रताप कौशिक ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि अनिल वर्मा ने अपनी पत्नी की फर्म के नाम राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नौ करोड़ रुपये की भूमि मात्र 17 लाख रुपये में आवंटित कर दी। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि मेसर्स इंडस एजूकेशन सोसाइटी को इंजीनियरिंग कालेज के लिए 25 एकड़ भूमि दी गई।
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इसी प्रकार से अनिल वर्मा की पत्नी नीना वर्मा की पार्टनर फर्म मेसर्स डिजाइन इन कारपोरेट्स को भी करोड़ों की जमीन कौड़ी के भाव में देकर सरकार को आठ करोड़ 90 लाख रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचाई गई। सीबीआई ने इस मामले में यह कहते हुए वर्मा को क्लीन चिट दे दी है कि आवंटन मुख्यालय द्वारा किया गया है, इसमें वर्मा की कोई भूमिका नहीं है।
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