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Allahabad Highcourt: कानूनों को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड क्यों नहीं कर रही सरकार
Tue, 07 Dec 2021 11:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 07 Dec 2021 11:33 PM IST
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allahabad highcourt
- फोटो : social media
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को यूपी सरकार से पूछा है कि वह अपने बनाए गए कानूनों को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड क्यों नहीं कर रही है? कोर्ट ने कहा कि सरकार ने कई कानून बनाए हैं। उनमें संशोधन भी हुए हैं। लेकिन निजी प्रकाशक उनका सही प्रकाशन नहीं करते हैं। इससे न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को परेशानी होती है। गलत प्रकाशित कानूनों की वजह से कोर्ट को भी केसों की सुनवाई केदौरान सही जानकारी नहीं मिल पाती है।
जनहित याचिका की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह अपने कानून को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करे, ताकि आम जनता और कानून से जुड़े लोगों को सही जानकारी मिल सके। इस संबंध में सरकार की ओर से पिछली सुनवाई केदौरान हलफनामा दाखिल किया गया था।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि उसने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर कानूनों और उनमें होने वाले संशोधनों को अपलोड करने की व्यवस्था बनाई है। इस पर कोर्ट ने उपस्थित अपने स्टाफ से जानकारी मांगी। कहा कि वे देखें कि सरकार कीकिस वेबसाइट पर कानून संबंधी जानकारी, एक्ट और रूल्स अपलोड हैं।
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स्टाफ ने चेक किया तो वेबसाइट पर जानकारी नहीं मिली। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को स्थिति की सही जानकारी देने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने 16 दिसंबर की तारीख तय कर दी।
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जनहित याचिका की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह अपने कानून को सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करे, ताकि आम जनता और कानून से जुड़े लोगों को सही जानकारी मिल सके। इस संबंध में सरकार की ओर से पिछली सुनवाई केदौरान हलफनामा दाखिल किया गया था।
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सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि उसने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर कानूनों और उनमें होने वाले संशोधनों को अपलोड करने की व्यवस्था बनाई है। इस पर कोर्ट ने उपस्थित अपने स्टाफ से जानकारी मांगी। कहा कि वे देखें कि सरकार कीकिस वेबसाइट पर कानून संबंधी जानकारी, एक्ट और रूल्स अपलोड हैं।
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स्टाफ ने चेक किया तो वेबसाइट पर जानकारी नहीं मिली। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट को स्थिति की सही जानकारी देने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने 16 दिसंबर की तारीख तय कर दी।