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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court said - Buyer is entitled to interest if he does not get the flat in due time

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- तय समय में फ्लैट न मिलने पर खरीदार ब्याज पाने का हकदार

Thu, 19 Nov 2020 02:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 19 Nov 2020 02:38 AM IST
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Allahabad High Court said - Buyer is entitled to interest if he does not get the flat in due time
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : PTI

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमोटर द्वारा समय से प्रोजेक्ट पूरा करके ग्राहकों को फ्लैट उपलब्ध न करा पाने की स्थिति में रियल स्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (रेरा) द्वारा सुनवाई और आदेश देने की अधिकारिता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रमोटर ने बिल्डिंग के सभी विकास कार्य पूरे किए बिना ही बिल्डिंग की पूर्णता का प्रमाणपत्र पाने के लिए आवेदन कर दिया। इतना करने मात्र से वह रेरा की अधिकारिता से बाहर नहीं हो जाता है। कोर्ट ने रेरा द्वारा प्रमोटर को 60 दिन में क्रेताओं को कब्जा सौंपने और विलंब का ब्याज अदा करने के आदेश को क्षेत्राधिकार के तहत दिया गया आदेश करार दिया है। 

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गौतमबुद्ध नगर पैरामाउंट प्रोप बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज करते हुए यह निर्णय न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति डा. वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने सुनाया। याची कंपनी ने पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट नाम से प्रोजेक्ट की शुरूआत की। उसने क्रेताओं को दस अगस्त 2011 को एलाटमेंट लेटर जारी कर दिया। प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा नहीं हो पाया तो 50 से अधिक क्रेताओं ने रेरा में शिकायत दर्ज करा दी। रेरा ने पाया कि प्रोजेक्ट पूरा करने में चार वर्ष से अधिक का विलंब हुआ है। 
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उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के अलावा तकनीकी विशेषज्ञों से भौतिक निरीक्षण कराकर उनकी रिपोर्ट के आधार पर रेरा ने प्रमोटर को 60 दिन में कब्जा सौंपने और विलंब के लिए क्रेताओं को ब्याज देने का निर्देश दिया। इस आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी गई कि याची का प्रोजेक्ट अपूर्ण प्रोजेक्ट ( ऑन गोइंग) नहीं है। याची सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदन कर चुका है। इसलिए वह रेरा अधिनियम 2016 की धारा 2(एच) की परिधि में नहीं आता है।
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ऐसी स्थिति में रेरा को उसके खिलाफ शिकायत सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं है। धारा धारा 2(एच) में प्रावधान है कि 2016 में अधिनियम लागू होने के समय जो बिल्डिंग प्रोजेक्ट अपूर्ण हैं उनको भी रेरा के तहत पंजीकरण कराना होगा और वह अधिनियम के दायरे में होंगे। 


कोर्ट ने कहा कि रेरा ने भौतिक सत्यापन में पाया है प्रोजेक्ट का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है और सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। अग्निशमन सहित कई विभागों से एनओसी लेने का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में इसे ऑन गोइंग प्रोजेक्ट मानना सही है। कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति में प्रोजेक्ट को धारा धारा 2(एच) की परिधि से बाहर नहीं माना जा सकता है। रेरा को सुनवाई का क्षेत्राधिकार है और उसके आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है।
 

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