फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court: Provisions of Section 4 and 5 of CrPC do not apply in offenses under IPC

Allahabad High Court : सीआरपीसी की धारा 4 और 5 के प्रावधान आईपीसी के तहत अपराधों में लागू नहीं होते

Thu, 30 Jun 2022 01:37 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 30 Jun 2022 01:37 AM IST
सार

याचिकाकर्ताओं ने धारा 420 ए, 406 ए, 120 बी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की प्रार्थना की थी। प्राथमिकी में आरोप है कि याचिकाकर्ता मोहर पाल को वादी मुकदमा के बैंक से 2,03,280 रुपये का बैंक लेन देन किया गया।

विज्ञापन
Allahabad High Court: Provisions of Section 4 and 5 of CrPC do not apply in offenses under IPC
Allahabad High Court

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्णय दिया है कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 4 और 5 के प्रावधान भारतीय दंड संहिता के तहत किए गए अपराधों में लागू नहीं होते। यह प्रावधान वहां लागू होते हैं जहां एनआई एक्ट के तहत अपराध करने की शिकायत की गई है। हाईकोर्ट ने 5000 रुपये के हर्जाने के साथ याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन

यह आदेश डॉ. कौशल जयेंद्र ठाकर और न्यायमूर्ति गौतम चौधरी की खंडपीठ ने मोहर पाल व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 4 व 5 के प्रावधान उस प्रक्रिया से संबंधित हैं, जहां विशेष अधिनियम के तहत अपराध किया जाता है।
विज्ञापन



याचिकाकर्ताओं ने धारा 420 ए, 406 ए, 120 बी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की प्रार्थना की थी। प्राथमिकी में आरोप है कि याचिकाकर्ता मोहर पाल को वादी मुकदमा के बैंक से 2,03,280 रुपये का बैंक लेन देन किया गया। बैंक खाते के माध्यम से पैसे दिए जाने के बावजूद वादी मुकदमा को कोई मशीन नहीं दी गई थी। इसलिए शिकायतकर्ता ने धारा 420 ए, 406 ए व 120 बी आईपीसी के तहत याचिकाकर्ताओं के खिलाफ  अपराध करने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



22 जून 2021 को पुलिस अधीक्षक पीलीभीत को पहली सूचना दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए वादी मुकदमा ने अदालत का रुख किया,  जिसमें कोर्ट ने जांच का निर्देश दिया। क्योंकि यह प्रथम दृष्टया पाया गया कि आरोपी द्वारा संज्ञेय अपराध किया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा कहा गया कि कथित घटना 25 अगस्त 2020 को हुई थी। लेकिन प्राथमिकी 25 फरवरी 2022 को बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के दर्ज की गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed