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UP: समझदार नाबालिग को पसंद के व्यक्ति संग रहने का अधिकार, मां के इनकार करने पर हाईकोर्ट ने पति को सौंपी किशोरी
Sun, 17 Dec 2023 10:58 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 17 Dec 2023 10:58 AM IST
सार
समझदार नाबालिग को पसंद के व्यक्ति संग रहने का अधिकार है। मां ने नाबालिग की अभिरक्षा लेने से इनकार कर दिया। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग को पति को सौंप दिया। मर्जी से शादी के बाद नाबालिग को नारी निकेतन भेज दिया गया था।
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Allahabad High Court
- फोटो : Social Media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नारी निकेतन की एक नाबालिग लड़की की अभिरक्षा उसके पति को सौंपने की इजाजत देते हुए कहा कि समझदार और अपने भविष्य का बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने में सक्षम नाबालिग को अपने पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। वह अपनी मर्जी से जीवन जीने की हकदार है।
यह फैसला न्यायमूर्ति बीके बिरला और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने अलीगढ़ के नारी निकेतन की नाबालिग सनिवासिनी और उसके पति की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल याचिका को स्वीकार करने हुए सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी नाबालिग लड़की जो अपने हित और जीवन के लिए समझदारी भरा निर्णय लेने में सक्षम है, उसे अपने पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। अपने भविष्य के लिए बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने की क्षमता रखने वाली नाबालिग की अभिरक्षा का निर्णय लेते समय उसके हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
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मामला अलीगढ़ का है। नाबालिग लड़की की मां ने उसके पति मनीष प्रताप के खिलाफ अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में नाबालिग के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने पुलिस ने लड़की को बरामद कर नारी निकेतन भेज दिया था, जबकि पति को जेल भेज दिया गया।
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यह फैसला न्यायमूर्ति बीके बिरला और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने अलीगढ़ के नारी निकेतन की नाबालिग सनिवासिनी और उसके पति की ओर से संयुक्त रूप से दाखिल याचिका को स्वीकार करने हुए सुनाया।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसी नाबालिग लड़की जो अपने हित और जीवन के लिए समझदारी भरा निर्णय लेने में सक्षम है, उसे अपने पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार है। अपने भविष्य के लिए बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने की क्षमता रखने वाली नाबालिग की अभिरक्षा का निर्णय लेते समय उसके हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
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मामला अलीगढ़ का है। नाबालिग लड़की की मां ने उसके पति मनीष प्रताप के खिलाफ अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में नाबालिग के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने पुलिस ने लड़की को बरामद कर नारी निकेतन भेज दिया था, जबकि पति को जेल भेज दिया गया।
जमानत पर बाहर आने के बाद पति-पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने दलील दी कि उन्होंने अपनी इच्छा से शादी की है और पति-पत्नी की तरह रह रहे हैं। लड़की के शैक्षिक रिकॉर्ड से पता चला कि शादी के समय उसकी आयु 16 वर्ष चार माह थी। वे दोनों अपने भविष्य के बारे में समझदारी पूर्ण निर्णय लेने में सक्षम हैं।
कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि इस अदालत की अन्य पीठों ने लगातार यह दृष्टिकोण अपनाया है कि जो नाबालिग अपने भविष्य के जीवन के लिए निर्णय लेने की क्षमता रखती है और स्वेच्छा से वैवाहिक रिश्ते में बंधी है, उस पर विचार करना चाहिए। वो भी तब जब नाबालिग की मां ने उसकी अभिरक्षा लेने से इन्कार कर दिया हो। ऐसे हालात में वह अपने पति के साथ जाने के लिए स्वतंत्र है।